- बोरना पंचायत में मुख्यमंत्री की 'हर घर नल का जल' योजना की ज़मीनी हकीकत का पर्दाफाश।
- PHED के JE अवधेश द्वारा सरपंच और ग्रामीणों का नंबर ब्लॉक करने का कैमरे पर खुलासा।
- ग्रामीणों का गुस्सा और बुजुर्ग ग्रामीण की गवाही: "पूरे पंचायत में योजना फेल है।"
- सरपंच N K Singh के कड़े रुख के बाद ठेकेदार द्वारा 15 दिन के अंदर काम पूरा करने का अल्टीमेटम स्वीकार।
बिहार सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक— "हर घर नल का जल"। कागज़ों पर यह योजना जितनी सुनहरी दिखती है, ज़मीन पर इसका सच उतना ही स्याह और डरावना है। बोरना पंचायत के लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे थे, और अधिकारी अपने एयर-कंडीशन्ड कमरों में बैठकर 'सब चंगा सी' का दावा कर रहे थे। एक जनप्रतिनिधि के तौर पर जब मैंने इस सिस्टम से लड़ना शुरू किया, तो मुझे उस अहंकार का सामना करना पड़ा जो अक्सर सरकारी कुर्सियों पर बैठते ही अधिकारियों में आ जाता है।
🔴 जब PHED के JE ने सरपंच और जनता का नंबर किया ब्लॉक!
बोरना पंचायत के अलग-अलग वार्डों से मेरे पास लगातार शिकायतें आ रही थीं कि नल-जल योजना के तहत पाइप तो बिछा दिए गए हैं, स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया है, लेकिन पानी का नामोनिशान नहीं है। जब मैंने इस मामले में PHED विभाग के जेई (JE) अवधेश जी को फोन करना शुरू किया, तो उन्होंने जो किया वह हैरान करने वाला था। एक सरकारी अधिकारी, जिसकी ज़िम्मेदारी जनता की समस्या सुनना है, उसने मेरा और ग्रामीणों का नंबर ही 'ब्लॉक' कर दिया! उनका तर्क था कि उनके पास टाइम नहीं है और लोग उन्हें फोन करके 'परेशान' करते हैं।
लेकिन लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को ब्लॉक नहीं किया जा सकता। काफी दबाव, आग्रह और विनती के बाद, अंततः जेई अवधेश जी और नल-जल का काम देखने वाली एजेंसी के ठेकेदार (सचिन बाबू) को बोरना पंचायत के वार्ड नंबर 10 में ग्राउंड ज़ीरो पर आना ही पड़ा।
[मूल साक्ष्य / Original Evidence]: इस घटना का ओरिजिनल लाइव वीडियो 27 नवंबर 2021 को हमारे फेसबुक पेज पर पब्लिश किया गया था। ऐतिहासिक प्रामाणिकता के लिए आप वह ओरिजिनल फेसबुक वीडियो इस लिंक पर देख सकते हैं:
▶ Facebook Video Link🟢 "पूरे पंचायत में योजना फेल है" - एक बुजुर्ग का दर्द
जैसे ही अधिकारी मौके पर पहुंचे, मैंने सीधा कैमरा ऑन किया और अधिकारियों के सामने ही गांव के एक बुजुर्ग बाबा से पूछा, "नीतीश कुमार जी की योजना है हर घर नल-जल... आपके यहाँ पानी आ रहा है?"
बाबा का जवाब पूरे सिस्टम के मुंह पर तमाचा था— "नहीं भाई, जब से तैयार हुआ है, ये सक्सेस नहीं है। पूरे बोरना पंचायत में कहीं कोई नल चालू नहीं है।"
मैंने जेई अवधेश जी को बीच में रोका और सरेआम पूछा कि "आप फोन क्यों ब्लॉक करते हैं?" इस पर वो गोलमोल जवाब देने लगे कि "मैं सात नंबर वार्ड में हूँ, फिर भी आप लोग 10 नंबर वार्ड का कंप्लेंट करते हैं।"
🔴 उग्र ग्रामीण और ठेकेदार का 15 दिन का अल्टीमेटम
ग्रामीणों का सब्र अब टूट रहा था। भीड़ में से सवाल गूंजने लगे— "खत्म कब होगा काम? आधा दिन? चार दिन? पांच दिन?" इस बीच एजेंसी का ठेकेदार (सचिन बाबू) भीड़ के पीछे छुपने की कोशिश कर रहा था। मैंने उसे आगे खींचा और स्पष्ट कहा, "आप पीछे क्यों खड़े हैं? आगे आइए और जवाब दीजिए।"
सरेआम हुई इस बहस के बाद ठेकेदार सचिन बाबू ने कैमरे पर स्वीकार किया कि: "15 तारीख तक मेरा सारा काम खत्म हो जाएगा।" (यानी 15 से 20 दिन का अल्टीमेटम दिया गया)। इस फैसले पर वहां मौजूद ग्रामीणों ने तालियां बजाकर अपनी खुशी जाहिर की।
🟢 काम से बचने के लिए 'बिजली विभाग' का बहाना
जब ठेकेदार को लगा कि अब वो पूरी तरह फंस चुके हैं, तो उन्होंने अपनी नाकामी का ठीकरा 'बिजली विभाग' पर फोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि "बिजली विभाग की वजह से जो त्रुटि है, उसकी गारंटी हम नहीं लेंगे।" जेई अवधेश जी ने भी उनका साथ देते हुए कहा कि ट्रांसफार्मर का अर्थिंग कमजोर है, इसलिए वोल्टेज नहीं मिलता।
मैंने उन्हें वहीं रोक दिया। मैंने स्पष्ट किया कि पूरे पंचायत में सिर्फ एक प्लांट पर बिजली/ट्रांसफार्मर की समस्या हो सकती है, लेकिन इसके बहाने आप पूरे बोरना पंचायत को प्यासा नहीं रख सकते। अगर अर्थिंग की दिक्कत है, तो अलग से व्यवस्था करना और प्लांट को सुचारू रूप से चलाना एजेंसी का ही काम है। इस 'ऑन-स्पॉट' क्लास के बाद अधिकारियों को यह समझ आ गया कि बोरना पंचायत में हवा-हवाई बातें और फोन ब्लॉक करने की नीति अब नहीं चलेगी।
🎥 ग्राउंड रिपोर्ट का वीडियो साक्ष्य
▶ वीडियो का पूर्ण संवाद (Full Video Transcript & Key Moments)
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