जनप्रतिनिधियों के मानदेय के लिए फिर उठी आवाज़, नवल किशोर सिंह ने पंचायत राज पदाधिकारी को सौंपा लिखित आवेदन


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“जनता की सेवा करने वाले जनप्रतिनिधियों का मानदेय समय पर क्यों नहीं?”—समय पर भुगतान की मांग

पंचायतों में जनता की समस्याओं को लेकर दिन-रात काम करने वाले जनप्रतिनिधियों के मानदेय का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। ग्राम कचहरी बोरना के सरपंच नवल किशोर सिंह ने गोगरी प्रखंड के पंचायत जनप्रतिनिधियों के लंबित मानदेय को लेकर पंचायत राज पदाधिकारी, गोगरी को लिखित आवेदन सौंपकर जल्द आवश्यक आवंटन उपलब्ध कराने और मानदेय भुगतान की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है।

इस आवेदन की प्रतिलिपि प्रखंड विकास पदाधिकारी, गोगरी को भी दी गई है, ताकि मामले में आवश्यक कार्रवाई हो सके।

यह सिर्फ मानदेय का सवाल नहीं, सम्मान का भी सवाल है

पंचायत के जनप्रतिनिधि सीधे जनता के बीच रहकर काम करते हैं। गांव की सड़क, नाली, पानी, बिजली, सफाई, सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याएं हों या किसी जरूरतमंद की आवाज प्रशासन तक पहुंचानी हो—जनप्रतिनिधियों की भूमिका लगातार बनी रहती है।

ऐसे में जब निर्धारित मानदेय समय पर नहीं मिलता, तो इसका असर सिर्फ आर्थिक स्थिति पर नहीं पड़ता, बल्कि यह सवाल भी खड़ा होता है कि जनप्रतिनिधियों के कार्य और जिम्मेदारी को व्यवस्था कितनी गंभीरता से ले रही है?

नवल किशोर सिंह का कहना है कि यह मांग किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं है। गोगरी प्रखंड के सभी पंचायत जनप्रतिनिधियों के लंबित मानदेय के भुगतान की बात उठाई गई है।

पहले भी उठती रही है आवाज़

मानदेय के मुद्दे पर यह पहली बार आवाज नहीं उठाई गई है। इससे पहले भी नवल किशोर सिंह द्वारा जनप्रतिनिधियों के मानदेय से संबंधित समस्या को अधिकारियों के सामने रखने का प्रयास किया जाता रहा है।

लेकिन सवाल अभी भी वही है—आखिर मानदेय के भुगतान में देरी कब तक?

एक जनप्रतिनिधि जब जनता के सामने खड़ा होता है तो उससे लोग अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद करते हैं। लेकिन दूसरी ओर यदि उसी जनप्रतिनिधि को अपने ही मानदेय के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें और आवेदन देना पड़े, तो यह व्यवस्था के सामने एक गंभीर सवाल है।

लिखित आवेदन के जरिए फिर स्पष्ट की मांग

नवल किशोर सिंह ने अपने आवेदन में गोगरी प्रखंड के विभिन्न पंचायत प्रतिनिधियों—जिला परिषद सदस्य, प्रमुख, उपप्रमुख, मुखिया, उपमुखिया, पंचायत समिति, सरपंच, उपसरपंच, वार्ड सदस्य एवं पंच आदि के लंबित मानदेय का उल्लेख करते हुए आवश्यक आवंटन उपलब्ध कराने की मांग की है।

मांग साफ है—

लंबित मानदेय का भुगतान जल्द हो और भविष्य में जनप्रतिनिधियों को मानदेय के लिए लंबे इंतजार की स्थिति का सामना न करना पड़े।

अब देखना है प्रशासन क्या कदम उठाता है

लिखित आवेदन सौंपे जाने के बाद अब निगाहें पंचायत राज विभाग और स्थानीय प्रशासन पर हैं। जनप्रतिनिधियों को उम्मीद है कि उनकी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और लंबित मानदेय के भुगतान का रास्ता जल्द साफ होगा।

नवल किशोर सिंह का कहना है कि जनप्रतिनिधि जनता की आवाज होते हैं और उनकी समस्याओं को उठाना भी जनप्रतिनिधित्व का ही हिस्सा है। इसलिए जब तक समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना जारी रहेगा।

यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के मानदेय की नहीं, बल्कि उन तमाम पंचायत जनप्रतिनिधियों के अधिकार और सम्मान की है, जो गांव की जनता के बीच रहकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

**अब सवाल प्रशासन से है—

क्या जनप्रतिनिधियों का लंबित मानदेय जल्द मिलेगा?**

नवल किशोर सिंह
सरपंच, ग्राम कचहरी बोरना
प्रखंड–गोगरी, जिला–खगड़िया (बिहार)

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