एनके सिंह सरपंच
बोरना पंचायत, गोगरी, खगड़िया।
बोरना पंचायत में एक पीसीसी सड़क जो वार्ड संख्या 1 से वार्ड संख्या 3 से होते हुए वार्ड संख्या 5,6,7, को जड़ती है वह सड़क टूटने की घटना ने स्थानीय प्रशासन एवं पंचायत स्तर पर कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है, कि सड़क टूटने की आशंका पहले ही लिखित आवेदन देकर संबंधित पदाधिकारी को बताई गई थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।
24 जून 2026: पहले ही दी थी लिखित चेतावनी
एन.के. सिंह, ग्राम एक्टिविस्ट एवं सरपंच, बोरना, गोगरी, खगड़िया ने प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, गोगरी को पत्रांक संख्या 116/26, दिनांक 24/06/2026 के माध्यम से आवेदन देकर सड़क की स्थिति से अवगत कराया था।
आवेदन में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि बारिश एवं बाढ़ के पानी के कारण पीसीसी सड़क के नीचे की मिट्टी बह गई है। सड़क के नीचे खोखलापन हो गया है और भारी वाहनों के आवागमन से सड़क कभी भी टूट सकती है। इससे दुर्घटना होने की भी आशंका जताई गई थी।
7 अगस्त 2026: लगभग डेढ़ महीने बाद जारी हुआ पत्र
इस आवेदन के आलोक में प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, गोगरी ने पत्रांक संख्या 183/26, दिनांक 07/08/2026 को मुखिया एवं पंचायत सचिव के नाम पत्र जारी किया।
लेकिन सवाल यह है कि पत्र जारी होने के बाद क्या संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मियों ने स्थल निरीक्षण किया? क्या सड़क की वास्तविक स्थिति की जांच कराई गई? क्या सड़क को टूटने से बचाने के लिए कोई सुरक्षात्मक कदम उठाया गया?
एन.के. सिंह का आरोप है कि बार-बार ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद न तो गंभीरता से जांच की गई और न ही समय रहते कोई ठोस कार्रवाई हुई।
28 अक्टूबर 2026: आखिर वही हुआ जिसकी आशंका थी
जिस दुर्घटना की आशंका पहले ही व्यक्त की गई थी, आखिरकार वही हुआ। 28 अक्टूबर 2026 को बालू लदे ट्रैक्टर के गुजरने के दौरान पीसीसी सड़क टूट गई।
अगर समय रहते सड़क के नीचे एवं किनारे बोरी में मिट्टी भरकर उचित तरीके से सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई होती, तो संभवतः सड़क को इस नुकसान से बचाया जा सकता था।
आज सड़क टूट चुकी है। अब सवाल यह है कि इस नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा? समय रहते मामूली सुरक्षात्मक कार्य हो जाता तो सरकारी राशि से बनी सड़क को दोबारा क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता था।
एन.के. सिंह ने उठाए जवाबदेही पर सवाल
ग्राम एक्टिविस्ट एन.के. सिंह का कहना है कि जब किसी जनप्रतिनिधि या सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा किसी संभावित नुकसान की सूचना लिखित रूप में संबंधित पदाधिकारी को दी जाती है, तो उस पर समय रहते जांच एवं कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया है कि आवेदन देने के बावजूद सड़क की जांच क्यों नहीं हुई? प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी के पत्र के बाद मुखिया एवं पंचायत सचिव ने क्या कार्रवाई की? यदि समय रहते जांच और सुरक्षा कार्य कराया जाता, तो क्या इस नुकसान को रोका जा सकता था?
अब प्रशासन से मांग है कि:
- सड़क टूटने की घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- पत्रांक 116/26 एवं पत्रांक 183/26 के आधार पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की जाए।
- संबंधित पदाधिकारियों एवं जिम्मेदार कर्मियों से जवाबदेही तय की जाए।
- क्षतिग्रस्त पीसीसी सड़क की शीघ्र मरम्मत कराई जाए, ताकि आम लोगों का आवागमन सुरक्षित हो सके।
एक बड़ा सवाल: जब समय रहते लिखित चेतावनी दी गई थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सड़क टूटने के बाद सरकारी नुकसान और संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा?
आवेदन देना हमारा अधिकार है और उस पर कार्रवाई करना संबंधित व्यवस्था की जिम्मेदारी है। जनहित के मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
एन.के. सिंह
ग्राम एक्टिविस्ट | सरपंच, ग्राम कचहरी बोरना
गोगरी, जिला–खगड़िया, बिहार।