"बात जब समाज बदलने की हो, तो सिर्फ सिस्टम को कोसने से काम नहीं चलता। असली बदलाव तब आता है जब आप खुद ज़मीन पर उतरकर समाधान का हिस्सा बनते हैं।"
खगड़िया में शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की जो लड़ाई 'डिजिटल सरपंच' नवल किशोर सिंह आज लड़ रहे हैं, उसकी नींव सालों पहले रखी जा चुकी थी। 15 अक्टूबर 2022 का दिन इसी 'सकारात्मक ज़मीनी संघर्ष' (Constructive Activism) का एक बेहतरीन उदाहरण है, जब टीम ने अपने गृह क्षेत्र बोरना पंचायत से एक नई शुरुआत की।
सिर्फ सवाल नहीं, समाधान भी: बोरना पंचायत में बच्चों को बांटे गए कॉपी-कलम, शिक्षा पर ज़ोर
❞डॉ. कलाम के सपनों का भारत
भारत के पूर्व राष्ट्रपति और 'मिसाइल मैन' डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर बोरना पंचायत के 'मध्य विद्यालय बड़ी बोरना' में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कोई आम राजनीतिक जलसा या सिर्फ भाषणबाज़ी का मंच नहीं था, बल्कि बच्चों के भविष्य को संवारने की एक ठोस पहल थी।
'आम आदमी करे पुकार' संगठन के बैनर तले पंचायत के ज़रूरतमंद बच्चों के बीच पठन-पाठन की सामग्री (कॉपी, कलम) और चॉकलेट बांटे गए। उद्देश्य बिल्कुल साफ था—कलाम साहब के विज़न को ज़मीन पर उतारना और बच्चों के हाथों में वो 'शिक्षा का हथियार' थमाना जिससे वे अपना भविष्य बदल सकें।
15 अक्टूबर 2022: मध्य विद्यालय बड़ी बोरना में बच्चों को पठन-पाठन सामग्री वितरित करते हुए। (संदर्भ: फेसबुक आर्काइव)
रणनीतिक विज़न और ज़मीनी नेतृत्व
इस पूरे आयोजन और बिना किसी बड़े सरकारी फंड के ज़मीन पर काम करने के पीछे एक बहुत ही स्पष्ट रणनीतिक सोच (Strategic Vision) थी। संगठन के सलाहकार मिनहाज भारती (रणनीतिकार) और कोषाध्यक्ष नवल किशोर सिंह (ग्राम एक्टिविस्ट) की जोड़ी ने यह साबित किया कि अगर नीयत साफ हो और दिशा सही हो, तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है。
मिनहाज भारती के बौद्धिक मार्गदर्शन और नवल किशोर सिंह की अथक ज़मीनी मेहनत ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया। इस पुनीत कार्य में सहायक सलाहकार विक्रम जी (नवटोलिया) का सहयोग भी बेहद अहम रहा, जिन्होंने बच्चों तक एक-एक सामग्री पहुँचाने में पूरी शिद्दत से मदद की।
नवल किशोर सिंह का हमेशा से यह मानना रहा है कि, "लोगों की भलाई के लिए हम हर वक्त तत्पर हैं।" चाहे वह प्रशासन से स्कूलों की जर्जर छत की मरम्मत की मांग करना हो, या फिर खुद आगे आकर बच्चों को कॉपी-कलम बांटना हो—नवल और मिनहाज की यह टीम ज़मीन पर हर मोर्चे पर डटी है।
संपादकीय अपडेट: इस आयोजन और खगड़िया के ग्रामीण स्कूलों की जर्जर हालत पर नवल किशोर सिंह की विशेष 'फर्स्ट-पर्सन' डायरी (विस्तृत तस्वीरों के साथ) पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें:
✍️ उखड़ी दीवारें और मिसाइल मैन के सपने: डिजिटल सरपंच की डायरी