- 21 सितंबर 2024 को बोरना पंचायत के बाढ़ राहत शिविर का ज़मीनी निरीक्षण।
- एएनएम गीता कुमारी की उपस्थिति और ज़रूरी दवाओं (पैरासिटामॉल, डिक्लोफेनाक आदि) का पर्याप्त स्टॉक सराहनीय।
- CHO अमित कुमार चावला की ड्यूटी सप्ताह में केवल 3 दिन होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल।
- प्रभारी चंद्र प्रकाश जी से CHO की पूर्णकालिक (रेगुलर) ड्यूटी सुनिश्चित करने की सख्त मांग।
जब पंचायत बाढ़ की विभीषिका से जूझ रही हो, तो स्वास्थ्य सुविधाएं सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती हैं। इसी कड़ी में 21 सितंबर 2024 को ग्राम कचहरी बोरना में लगाए गए बाढ़ राहत शिविर (Medical Camp) का मैंने ज़मीनी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कुछ सकारात्मक बातें सामने आईं, लेकिन बिहार स्वास्थ्य विभाग की एक बहुत बड़ी खामी ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं。
🟢 सकारात्मक पहलू: दवाएं उपलब्ध, एएनएम मुस्तैद
शिविर में पहुँचने पर देखा गया कि हमारी एएनएम (ANM) गीता कुमारी जब से बाढ़ आई है, लगातार अपनी सेवाएं दे रही हैं। दवाओं के स्टॉक की भी कोई कमी नहीं है। शिविर में पैरासिटामॉल, मेट्रोन, कैल्शियम, डिक्लोफेनाक, निमेसुलाइड और गैस-कान की ज़रूरी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों का प्रयास सराहनीय है।
🔴 सिस्टम की नाकामी: डॉक्टर साहब सिर्फ 3 दिन!
समस्या तब उजागर हुई जब मैंने वहाँ मौजूद कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) अमित कुमार चावला से बातचीत की। एएनएम का काम दवा देना है, लेकिन मरीज की बीमारी को समझना (Diagnosis) और सही दवा लिखना CHO का काम है। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने CHO अमित कुमार की ड्यूटी हमारे पंचायत में सप्ताह में मात्र 3 दिन (बृहस्पतिवार, शुक्रवार, शनिवार) लगाई है! बाकी के दिन उन्हें किसी दूसरे सेंटर पर जाना पड़ता है।
यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह उठता है:
बाढ़ जैसी आपात स्थिति में जब बीमारियों का खतरा चरम पर है, तब क्या मरीज यह देखकर बीमार पड़ेंगे कि डॉक्टर साहब आज ड्यूटी पर हैं या नहीं? अगर 4 दिन डॉक्टर साहब पंचायत में नहीं रहेंगे, तो एएनएम केवल अंदाजे से दवाएं कैसे दे सकती हैं?
यह सीधे तौर पर बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ की भारी कमी और कुप्रबंधन को दर्शाता है। एक तरफ दवाइयां हैं, लेकिन उन्हें सही ढंग से प्रिस्क्राइब करने वाला डॉक्टर आधा सप्ताह गायब रहने को मजबूर है, क्योंकि विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है।
इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए CHO अमित कुमार चावला की रेगुलर (पूरे सप्ताह) ड्यूटी बोरना पंचायत में सुनिश्चित की जाए, ताकि बाढ़ पीड़ितों को प्राथमिक उपचार सही ढंग से मिल सके।
🎥 ग्राउंड रिपोर्ट का वीडियो साक्ष्य
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