बोरना ग्राउंड रिपोर्ट: काजी टोल में पलटी नाव, बाल-बाल बचा बच्चा— प्रशासनिक लापरवाही पर सरपंच की ब्लॉक घेराव की चेतावनी!

📍 स्थान: काजी टोल ढाला, वार्ड नंबर 10, ग्राम कचहरी बोरना (गोगरी, खगड़िया)
📅 दिनांक: 22 सितम्बर 2024
📝 रिपोर्ट: नवल किशोर सिंह (सरपंच एवं ग्राम एक्टिविस्ट)
📌 मुख्य बिंदु (Ground Report Highlights):
  • 22 सितंबर 2024 को काजी टोल ढाला (वार्ड 10) में 5 की क्षमता वाली नाव में 10 लोगों के सवार होने से हादसा।
  • पानी में गिरने से एक बच्चा बाल-बाल बचा; सूचना मिलते ही सरपंच नवल किशोर सिंह ने मौके पर पहुँचकर स्थिति संभाली।
  • बाढ़ पीड़ितों के लिए पर्याप्त भोजन और बड़ी नाव (डेंग) की व्यवस्था न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश।
  • NDRF की गैरमौजूदगी और DM-CO के फ़ोन न उठाने पर सरपंच ने दिया 'गोगरी ब्लॉक घेराव' का कड़ा अल्टीमेटम।

जब सिस्टम अंधा, बहरा और गूंगा हो जाए, तो ज़मीन पर जनता को मौत के साये में जीने को मजबूर होना पड़ता है। ग्राम कचहरी बोरना के काजी टोल ढाला (वार्ड नं 10) से आई 22 सितंबर 2024 की यह ग्राउंड रिपोर्ट महज़ एक ख़बर नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता दस्तावेज़ है。

बाढ़ का पानी 2021 के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 6-7 इंच ऊपर बह रहा है, लेकिन प्रशासन की नींद अभी तक नहीं टूटी है। इसी लापरवाही के कारण काजी टोल ढाला पर एक बड़ा हादसा होते-होते बचा।

खगड़िया जिले के बोरना पंचायत में सितंबर 2024 की बाढ़ के दौरान नाव हादसे के बाद की स्थिति को दर्शाती ग्राउंड रिपोर्ट
तस्वीर 01 : 📸 बोरना पंचायत, खगड़िया में सितंबर 2024 की बाढ़ के दौरान नाव हादसे के बाद की स्थिति का जायजा लेते सरपंच नवल किशोर सिंह। यह ग्राउंड रिपोर्ट बाढ़ राहत, नावों की उपलब्धता और प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को उजागर करती है。

🔴 क्या है पूरा मामला? कैसे पलटी नाव?

बीडीओ (BDO) साहब के फोन पर सूचना मिलने के बाद जब मैं (सरपंच नवल किशोर सिंह) तुरंत वार्ड 10 के काजी टोल ढाला पहुँचा, तो पता चला कि नाव किनारे पर पलट गई थी। राहत की बात यह रही कि कोई बड़ा जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन एक छोटा बच्चा पानी में गिर गया था। बच्चे ने पानी पी लिया था और वह बुरी तरह सहमा हुआ था।

🔴 500 की आबादी, 5 की क्षमता और महज़ 1 नाव!

प्रशासनिक कुप्रबंधन का आलम यह है कि सांसद से लेकर सीओ (CO) और एसडीओ (SDO) तक बार-बार गुहार लगाने के बावजूद पंचायत में अब तक बड़ी नाव की व्यवस्था (डेंग) नहीं कराई गई है। गिनती पूरी करने के लिए 10-11 नावें पंचायत में भेज दी गई हैं, लेकिन एक नाव की क्षमता मात्र 5-7 लोगों की है। एक वार्ड में 500 लोग फंसे हैं, ऐसे में छोटी नाव आखिर कितने चक्कर लगाएगी? हादसे के वक्त भी 5 की क्षमता वाली नाव में 10 लोग सवार थे, जिसके कारण नाव का संतुलन बिगड़ा और वह डूब गई।

बोरना पंचायत, खगड़िया में सितंबर 2024 की बाढ़ और नाव हादसे पर आधारित ग्राउंड रिपोर्ट का इन्फोग्राफिक कोलाज
तस्वीर 02 : 📊 बोरना पंचायत में सितंबर 2024 की बाढ़ और नाव हादसे के बाद की स्थिति को दर्शाता इन्फोग्राफिक। इसमें सरपंच नवल किशोर सिंह की ग्राउंड रिपोर्ट तथा प्रभावित ग्रामीणों से जुड़े प्रमुख तथ्य शामिल हैं。

🔴 भूखे पेट रात गुज़ारने को मजबूर ग्रामीण

सिर्फ आवागमन ही नहीं, लोगों के निवाले पर भी प्रशासन का ध्यान नहीं है। तीसरे दिन बांध पर लगभग 2000 से 3000 लोग शरण लिए हुए हैं, लेकिन कम्युनिटी किचन में मात्र 500 लोगों का खाना बन रहा है। रात के वक्त राहत के नाम पर महज़ 10-15 किलो आलू बांट दिया गया, जिसकी सब्ज़ी भी सबको नसीब नहीं हुई। क्या हमारी सरकार इतनी लाचार हो गई है? अगर हाँ, तो सरकार हाथ खड़े कर दे, हम ग्रामीण चंदा इकट्ठा करके खुद व्यवस्था कर लेंगे।

🔴 NDRF नदारद, डीएम-सीओ नहीं उठाते फोन

सवाल यह है कि इतने संवेदनशील हालात में NDRF की टीम ग्राउंड पर क्यों नहीं है? अगर टीम मौजूद होती, तो सही ढंग से लोगों को नाव पर बैठाने की ज़िम्मेदारी उनकी होती और यह हादसा रुक सकता था। जब इस आपात स्थिति की सूचना देने के लिए डीएम और सीओ साहब को फोन किया जाता है, तो वे फोन तक रिसीव नहीं करते। बड़ी मुश्किल से संपर्क होने पर शिविर प्रभारी का रटा-रटाया जवाब मिलता है— "मुझे जो सामान मुहैया होगा, मैं वही बनाऊँगा। मेरे पास सिर्फ तीन बोरा चावल है।"

आज जनता उग्र है और मैंने एक जनप्रतिनिधि होने के नाते किसी तरह उन्हें शांत करवाया है। लेकिन अगर डेंग (बड़ी नाव), पर्याप्त भोजन और NDRF की व्यवस्था तुरंत नहीं की गई, तो कल गोगरी ब्लॉक का घेराव किया जाएगा। यह चेतावनी स्पष्ट है— "शर्म करो, नहीं तो डूब मरो!"

— नवल किशोर सिंह, सरपंच (ग्राम कचहरी बोरना) एवं ग्राम एक्टिविस्ट

📢 जन-सूचना अपडेट (Transparency in Action):
यह ग्राउंड रिपोर्ट और इसका वीडियो साक्ष्य पब्लिक डोमेन में जारी किया जा रहा है ताकि ज़िला प्रशासन (खगड़िया) अपनी कुंभकर्णी नींद से जागे。

▶ वीडियो का पूर्ण संवाद (Full Video Transcript & Key Moments)
0:06 सरपंच: मैं ग्राम कचहरी बोरना से एन के सिंह, इस टाइम मैं काजी टोल ढाला वार्ड नंबर 10 पर हूँ। अभी बीडीओ साहब का फोन आया था कि एक बार पता कीजिए नाव डूब गया क्या? वाकई यहां आए तो पता चला कि नाव डूब गया है।
0:20 सरपंच: लेकिन नाव किनारे में ही डूबा है। एक बच्चे ने पानी पी लिया है। अभी देखा जा रहा है उसका क्या स्थिति है। बाकी कोई जान माल का नुकसान नहीं हुआ है। यही बच्चा है। देखिए इस बच्चा को पानी पीने से डरा हुआ है, सहमा हुआ है।
0:36 सरपंच: मैं प्रशासन से बार-बार नाव की डिमांड कर रहा हूँ। यहां तक कि मैं सांसद को भी कॉल करके बोला हूँ कि हमारे यहां सरकारी सुविधा का बहुत अभाव है। उन्होंने भी बोला कि ठीक है हम बात करते हैं। लेकिन अब तक कोई सुविधा सही ढंग से नहीं मिल पाई है।
0:56 सरपंच: नाव गिनती में 10-11 हमारे पंचायत में आ चुकी हैं, लेकिन नाव की जो स्थिति है, उसमें मात्र पांच-सात आदमी बैठेंगे। अभी वही 10 आदमी बैठ गए, नाव डूब गई यहां पे। छोटा-छोटा नाव है। नौ वार्ड में एक दिया है। एक वार्ड से 500 आदमी आने-जाने वाला है और नाव में पांच आदमी बैठेंगे। कितना चक्कर लगेगा नाव का?
1:39 सरपंच: अब सामुदायिक किचन बना हुआ है, वहां पर 500 आदमी का खाना बनता है और इस बांध पर 2000-3000 आदमी रात में रहता है। सब रात में भूखा रह गया। थोड़ा सा 10 किलो 15 किलो आलू दे दिया। क्या हमारी सरकार की यह स्थिति आ गई है? तो सरकार हाथ खड़ा करे, हम लोग चंदा देकर मुहैया करवाएंगे।
2:05 सरपंच: पानी चरम सीमा से ऊपर है, जो हम लोगों का 21 में बाढ़ आई थी उससे भी एक्स्ट्रा पानी आया, उससे लगभग 6 इंची 7 इंची पानी ओवर आया है लेकिन इस पर सरकार का कहीं ध्यान ही नहीं आ रहा है। इस तरह से अगर चलेगा तो फिर हम लोग ब्लॉक का घेराव करेंगे।
2:44 सरपंच: मैं शिविर प्रभारी से पूछ रहा हूँ, तो कह रहा मैं क्या करूँ? मुझे जो सामान मुहैया होगा मैं वही बनाऊंगा। अभी तीन बोरा चावल है उनके पास। ये मैसेज मैंने डीएम साहब को भी दिए हैं।
3:01 रिपोर्टर: एनडीआरएफ टीम यहां पे क्यों नहीं है अभी?
सरपंच: एनडीआरएफ टीम नहीं है यहां पर। अगर वो टीम रहती तो कम से कम हमारा ये हादसा होने से रुकता। क्योंकि उनकी जिम्मेदारी है सही ढंग से नाव पर जनता को बैठा के भिजवाना।
3:54 ग्रामीणों का प्रदर्शन: सीओ साहब मुर्दाबाद। सीओ साहब शर्म करो। शर्म नहीं तो डूब मरो। अरे एनडीआरएफ देना होगा... नौ की व्यवस्था ठीक करो नहीं तो इंकलाब जिंदाबाद!

क्या यह जन-मुद्दा महत्वपूर्ण है? बोरना की इस आवाज़ को प्रशासन तक पहुँचाने के लिए इस ग्राउंड रिपोर्ट को अधिक से अधिक शेयर करें।

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