गंगा और बूढ़ी गंडक की विनाशकारी बाढ़ से बचाने वाला जीएन बांध (गोगरी-नारायणपुर) आज खुद अतिक्रमणकारियों और प्रशासनिक उदासीनता का शिकार है। दैनिक भास्कर (18 दिसंबर 2025) की रिपोर्ट इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि कैसे सरपंच नवल किशोर सिंह और स्थानीय प्रतिनिधियों के बार-बार आवेदन देने के बावजूद प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है।
जीएन बांध पर अतिक्रमणकारियों का अवैध कब्जा, जिससे आम राहगीरों को भारी कष्ट हो रहा है और बांध कमजोर हो रहा है।
बोरना पंचायत के सरपंच नवल किशोर सिंह द्वारा अतिक्रमण मुक्त कराने हेतु अधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन दिए गए।
कई बार अल्टीमेटम और नोटिस के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं, अंचल अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं।
मीडिया प्रमाण (Digital Proofs)
नीचे दी गई तस्वीर में दैनिक भास्कर की मूल रिपोर्ट संलग्न है, जो इस पूरे मामले और जन प्रतिनिधियों के संघर्ष को प्रमाणित करती है:
अखबार की पूरी रिपोर्ट (Transcription)
जीएन बांध पर अब भी अतिक्रमण बरकरार, प्रशासन बना है उदासीन
मुखिया व सरपंच ने अधिकारियों को कई बार आवेदन दिया
भास्कर न्यूज | गोगरी: प्रखंड क्षेत्र में जीएन बांध पर वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण को हटाने में प्रशासन विफल साबित हुई है। अल्टीमेटम दिए जाने और कई बार नोटिस थमाने के बावजूद अतिक्रमणकारियों का कब्जा बना हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
खासकर शिवमंदिर से कुंडी गांव तक बांध की स्थिति बेहद खराब है। अतिक्रमणकारियों ने बांध के किनारे अवैध निर्माण कर रखा है, जिससे साइकिल, मोटरसाइकिल, कार या बस से गुजरने वाले राहगीरों को कष्ट होता है। अतिक्रमणकारियों में प्रशासन का कोई खौफ नहीं है और वे विरोध करने पर मारपीट तक पर उतर आते हैं।
बांध पर लगातार नए अतिक्रमण का प्रयास जारी है। बोरना पंचायत के मुखिया यास्मीन प्रवीण और सरपंच नवल किशोर सिंह ने बताया कि उन्होंने संबंधित अधिकारी को कई बार आवेदन दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कुछ वर्ष पहले बाढ़ प्रमंडल ने नापी कर अतिक्रमणकारियों को कई नोटिस जारी किए थे। अनुमंडल प्रशासन ने जून 2022 तक बांध को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया था, मगर आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जिससे अतिक्रमणकारियों का हौसला बढ़ गया है।
हाल ही में गोगरी-जमालपुर में सड़क से अतिक्रमण हटाए जाने से लोगों में उम्मीद जगी थी कि बांध भी मुक्त होगा, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई प्रयास नजर नहीं आ रहा। इस मामले में अंचल अधिकारी दीपक कुमार ने कहा कि बांध को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए जल्द ही माइकिंग और कार्रवाई की जाएगी।
ऐतिहासिक संदर्भ और निष्कर्ष
तटबंधों का अतिक्रमण सिर्फ एक भौगोलिक समस्या नहीं है, यह एक 'संभावित आपदा' को निमंत्रण देना है। दैनिक भास्कर की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि स्थानीय प्रतिनिधियों (विशेषकर सरपंच नवल किशोर सिंह) ने कागजी स्तर पर अपनी जिम्मेदारी पूरी की है, लेकिन 'सिस्टम' की लालफीताशाही इसके आड़े आ रही है। प्रशासन का बार-बार सिर्फ 'आश्वासन' देना और जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई न करना जन-सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है।
अपनी आवाज़ उठाएं, हम साथ हैं!
किसी भी ग्राम पंचायत की समस्या, भ्रष्टाचार या अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए प्रमाण (Proofs) के साथ नवल किशोर सिंह को सीधे ईमेल करें:
mail@nksingh.in