मीडिया में नवल- यूरिया व डीएपी की कालाबाजारी: किसानों के हक पर नवल किशोर सिंह का विद्रोह!

📍 स्थान: महेशखूंट थाना क्षेत्र (खगड़िया)
📅 प्रकाशन दिनांक: 8 जनवरी 2026
📰 स्रोत: दैनिक भास्कर (खगड़िया संस्करण)
📌 एक नज़र में (Key Highlights):
  • मुख्य मुद्दा: महेशखूंट थाना क्षेत्र में यूरिया और डीएपी खाद की भारी किल्लत व कालाबाजारी।
  • मनमानी वसूली: सरकारी दर से कहीं अधिक (यूरिया ₹300-325 और डीएपी ₹1400-1500) पर बिक्री।
  • जबरन खरीद: खाद के साथ नैनो उर्वरक खरीदने का किसानों पर अनावश्यक दबाव।
  • प्रशासन से मांग: ग्राम एक्टिविस्ट एवं बोरना सरपंच नवल किशोर सिंह ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

आज 8 जनवरी 2026 को दैनिक भास्कर ने अपने खगड़िया-महेशखूंट संस्करण में ग्राम-एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह (वर्तमान बोरना सरपंच) की किसानों के हक़ के लिए यूरिया व डीएपी की मनमानी कीमत वसूली के खिलाफ विरोध की आवाज उठाने की खबर को प्रकाशित किया।

भास्कर की रिपोर्टिंग के अनुसार, महेशखूंट थाना क्षेत्र के अंतर्गत खाद विक्रेताओं की मनमानी कीमत वसूली के कारण गरीब किसान बुरी तरह से परेशान और हताश हैं। भले ही एन के सिंह की पहचान बोरना सरपंच के रूप में हो, लेकिन नवल हमेशा 'ग्राम प्रहरी' और 'ग्राम एक्टिविस्ट' के तौर पर ही अपनी पंचायत सीमा से परे पूरे थाना क्षेत्र के लोगों की समस्या में साथ खड़े दिखते हैं।

महेशखूंट, खगड़िया में यूरिया (₹300-325) और डीएपी (₹1400-1500) की कालाबाजारी और नैनो उर्वरक जबरन थोपने के खिलाफ बोरना सरपंच नवल किशोर सिंह का विरोध - दैनिक भास्कर की 8 जनवरी 2026 की रिपोर्ट
तस्वीर 01 : 📰 महेशखूंट थाना क्षेत्र में यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी के खिलाफ किसानों के हक़ में आवाज़ उठाते ग्राम एक्टिविस्ट व सरपंच नवल किशोर सिंह।

🗞️ अखबार की पूरी रिपोर्ट: यूरिया व डीएपी की मनमानी कीमत वसूलने का आरोप

दैनिक भास्कर की 8 जनवरी 2026 की खबर की ओरिजिनल कटिंग - बोरना सरपंच नवल किशोर सिंह द्वारा यूरिया कालाबाजारी पर रोक की मांग
प्रमाण 📸: दैनिक भास्कर (खगड़िया संस्करण) की ओरिजिनल न्यूज़ कटिंग
भास्कर न्यूज | महेशखूंट

थाना क्षेत्र के विभिन्न बाजारों में उर्वरक विक्रेताओं की मनमानी से यूरिया और डीएपी की भारी किल्लत हो गई है, जिससे किसान बुरी तरह परेशान हैं।

कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकारी दर पर यूरिया 267.50 रुपये प्रति बोरा उपलब्ध होना चाहिए, लेकिन विक्रेता 300 से 325 रुपये तक वसूल रहे हैं। इसके अलावा, यूरिया के साथ नैनो और पावर उर्वरक खरीदना अनिवार्य कर दिया गया है, जो किसानों की मजबूरी बन गई है। जिन्हें इनकी जरूरत नहीं, वे भी मजबूरन खरीद रहे हैं।

इसी तरह, डीएपी की सरकारी दर 1350 रुपये प्रति बोरा है, लेकिन विक्रेता 1400 से 1500 रुपये तक ले रहे हैं। इससे किसानों को आवश्यक मात्रा में उर्वरक नहीं मिल पा रहा, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

बोरना पंचायत के सरपंच नवल किशोर सिंह ने इस मनमाने रवैये पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर किसानों को राहत प्रदान करनी चाहिए, ताकि उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।

📖 ऐतिहासिक संदर्भ (Context)

बिहार में बुआई के समय उर्वरकों (खासकर यूरिया और DAP) की कृत्रिम किल्लत और कालाबाजारी एक गंभीर समस्या रही है। ऐसे समय में जब आम किसान सिंडिकेट के डर से खुलकर बोलने से कतराते हैं, नवल जी का आगे आना उनके जन-सरोकार और किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को पुख्ता करता है। उनका यह कदम साबित करता है कि वे सिर्फ कागजी प्रशासक नहीं, बल्कि जमीन पर जनता की लड़ाई लड़ने वाले नेता हैं।

📌 इस मुद्दे से जुड़े मुख्य तथ्य (Quick Context)

प्रश्न: महेशखूंट थाना क्षेत्र में यूरिया और डीएपी खाद की क्या समस्या है?

उत्तर: महेशखूंट में उर्वरक विक्रेता सरकारी दर से काफी अधिक कीमत (यूरिया ₹300-325 और डीएपी ₹1400-1500) पर खाद की कालाबाजारी कर रहे हैं और किसानों पर नैनो उर्वरक जबरन थोप रहे हैं।

प्रश्न: यूरिया और डीएपी खाद की निर्धारित सरकारी दर क्या है?

उत्तर: सरकारी दर के अनुसार यूरिया की कीमत 267.50 रुपये प्रति बोरा और डीएपी की कीमत 1350 रुपये प्रति बोरा निर्धारित की गई है।

प्रश्न: खाद की कालाबाजारी के खिलाफ किसने आवाज़ उठाई है?

उत्तर: बोरना पंचायत के सरपंच और ग्राम एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह ने दैनिक भास्कर की रिपोर्ट (8 जनवरी 2026) के माध्यम से किसानों के हक में आवाज़ उठाई है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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