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आज 8 जनवरी 2026 को दैनिक भास्कर ने अपने खगड़िया-महेशखूंट संस्करण में ग्राम-एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह (वर्तमान बोरना सरपंच) की किसानों के हक़ के लिए यूरिया व डीएपी की मनमानी कीमत वसूली के खिलाफ विरोध की आवाज उठाने की खबर को प्रकाशित किया।
भास्कर की रिपोर्टिंग के अनुसार, महेशखूंट थाना क्षेत्र के अंतर्गत खाद विक्रेताओं की मनमानी कीमत वसूली के कारण गरीब किसान बुरी तरह से परेशान और हताश हैं।
भले एन के सिंह की पहचान बोरना सरपंच के रूप में हो, लेकिन नवल हमेशा 'ग्राम प्रहरी' और 'ग्राम एक्टिविस्ट' के तौर पर ही अपनी पंचायत सीमा से परे पूरे थाना क्षेत्र के लोगों की समस्या में साथ खड़े दिखते हैं।
एक नज़र में (Key Highlights):
- मुख्य मुद्दा: खगड़िया के महेशखूंट थाना क्षेत्र में यूरिया और डीएपी की भारी किल्लत और कालाबाजारी।
- किसानों का शोषण: यूरिया 300-325 रुपये में बेचा जा रहा है और नैनो उर्वरक जबरन थोपे जा रहे हैं।
- नवल किशोर सिंह का हस्तक्षेप: बोरना पंचायत के सरपंच नवल किशोर सिंह ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की कड़े शब्दों में मांग की।
- प्रकाशित: दैनिक भास्कर (खगड़िया संस्करण) - 8 जनवरी 2026
अखबार की पूरी रिपोर्ट: यूरिया व डीएपी की मनमानी कीमत वसूलने का आरोप
भास्कर न्यूज | महेशखूंट
थाना क्षेत्र के विभिन्न बाजारों में उर्वरक विक्रेताओं की मनमानी से यूरिया और डीएपी की भारी किल्लत हो गई है, जिससे किसान बुरी तरह परेशान हैं।
कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकारी दर पर यूरिया 267.50 रुपये प्रति बोरा उपलब्ध होना चाहिए, लेकिन विक्रेता 300 से 325 रुपये तक वसूल रहे हैं। इसके अलावा, यूरिया के साथ नैनो और पावर उर्वरक खरीदना अनिवार्य कर दिया गया है, जो किसानों की मजबूरी बन गई है। जिन्हें इनकी जरूरत नहीं, वे भी मजबूरन खरीद रहे हैं।
इसी तरह, डीएपी की सरकारी दर 1350 रुपये प्रति बोरा है, लेकिन विक्रेता 1400 से 1500 रुपये तक ले रहे हैं। इससे किसानों को आवश्यक मात्रा में उर्वरक नहीं मिल पा रहा, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
बोरना पंचायत के सरपंच नवल किशोर सिंह ने इस मनमाने रवैये पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर किसानों को राहत प्रदान करनी चाहिए, ताकि उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।
ऐतिहासिक संदर्भ (Context)
बिहार में बुआई के समय उर्वरकों (खासकर यूरिया और DAP) की कृत्रिम किल्लत और कालाबाजारी एक गंभीर समस्या रही है। ऐसे समय में जब आम किसान सिंडिकेट के डर से खुलकर बोलने से कतराते हैं, नवल जी का आगे आना उनके जन-सरोकार और किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को पुख्ता करता है। उनका यह कदम साबित करता है कि वे सिर्फ कागजी प्रशासक नहीं, बल्कि जमीन पर जनता की लड़ाई लड़ने वाले नेता हैं।
अपनी आवाज़ उठाएं, हम साथ हैं!
किसी भी ग्राम पंचायत की समस्या, भ्रष्टाचार या अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए प्रमाण (Proofs) के साथ नवल किशोर सिंह को सीधे ईमेल करें:
mail@nksingh.in- Get link
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