मीडिया में नवल- गोगरी-नारायणपुर तटबंध पर अतिक्रमण: लाखों लोगों की सुरक्षा के लिए नवल किशोर सिंह ने उठाया मुद्दा!
7 मार्च 2026 को दैनिक जागरण (खगड़िया संस्करण) ने गोगरी-नारायणपुर तटबंध पर हो रहे जानलेवा अतिक्रमण को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की। गंगा और बूढ़ी गंडक की विनाशकारी बाढ़ से बचाने वाला यह 51 किलोमीटर लंबा तटबंध अवैध कब्जों और स्थायी संरचनाओं के कारण कमजोर हो रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों के ढुलमुल रवैये के बीच ग्राम कचहरी बोरना के सरपंच नवल किशोर सिंह ने इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने बताया कि इस गंभीर खतरे को लेकर उन्होंने पूर्व में ही वरीय पदाधिकारियों को लिखित आवेदन दिया था, ताकि समय रहते तटबंध को सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त किया जा सके। (नीचे दी गई पहली तस्वीर में नवल किशोर सिंह इस मुद्दे को उठाते हुए और दूसरी तस्वीर में दैनिक जागरण की मूल रिपोर्ट संलग्न है)।
एक नज़र में (Key Highlights):
- मुख्य मुद्दा: 51 किमी लंबे गोगरी-नारायणपुर तटबंध पर अवैध अतिक्रमण और स्थायी (पक्की) संरचनाओं का निर्माण।
- खतरा: अतिक्रमण से तटबंध कमजोर हो रहा है, जिससे बाढ़-बरसात के मौसम में खगड़िया और भागलपुर (नारायणपुर) के लाखों लोगों की जान-माल पर सीधा खतरा है।
- नवल किशोर सिंह की पहल: प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल उठाते हुए सरपंच नवल किशोर सिंह ने बताया कि उन्होंने पूर्व में ही अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकारियों को आवेदन दिया था, पर अब तक ठोस पहल नहीं हुई।
- प्रकाशित: दैनिक जागरण (खगड़िया संस्करण) - 7 मार्च 2026
अखबार की पूरी रिपोर्ट: गोगरी-नारायणपुर तटबंध पर अतिक्रमण
51 किमी लंबे तटबंध पर जगह-जगह है अतिक्रमण, कहीं-कहीं स्थाई संरचना भी है खड़ी
संवाद सूत्र, जागरण. महेशखूंट (खगड़िया): गंगा और बूढ़ी गंडक की बाढ़ से सुरक्षा को लेकर गोगरी-नारायणपुर तटबंध बना हुआ है। यह खगड़िया जिला का सबसे लंबा तटबंध है। इसकी लंबाई 51 किलोमीटर के आसपास है। यह खगड़िया जिला के दो प्रखंड, गोगरी और परबत्ता समेत भागलपुर जिले के नारायणपुर को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करती है।
तटबंध पर कालीकरण सड़क है। परंतु तटबंध किनारे-किनारे जगह-जगह भयानक अतिक्रमण है। जो बाढ़-बरसात के मौसम में खतरे का कारण बन सकता है। वहीं अन्य दिनों भी सहज आवागमन में बाधक है। गोगरी प्रखंड के बन्नी के पास, गोगरी के समीप जबरदस्त अतिक्रमण है। गोगरी के पास तो अतिक्रमणकारियों ने पक्के की मजबूत संरचना खड़ी कर ली है। जिससे तटबंध की सुरक्षा और संरचना पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। तटबंध पर मवेशी बांधे जाते हैं। बन्नी के पास तटबंध के पूरब की खाली 20 फीट जमीन को भी अतिक्रमणकारी अपने कब्जे में ले चुके हैं। अतिक्रमण के कारण तटबंध कमजोर होता जा रहा है। बाढ़-बरसात के मौसम में तटबंध की सुरक्षा पर खतरा बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों ने इस ओर वरीय अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया है। तटबंध को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है। ताकि तटबंध सुरक्षित रहे और सहज आवागमन में आमजन को कोई परेशानी नहीं हो। मालूम हो कि तटबंध पर होकर पीचिंग सड़क गुजरी है।
बोरना पंचायत के सरपंच नवल किशोर सिंह ने बताया कि अतिक्रमण हटाने को लेकर पूर्व में वरीय पदाधिकारियों को आवेदन भी दिए गए हैं। परंतु अतिक्रमण हटाने की दिशा में अबतक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने शीघ्र इस दिशा में पहल करने की मांग की है।
(अखबार में प्रकाशित एसडीओ का बयान: "अतिक्रमण पर नजर है। जल्द ही अतिक्रमण हटाने को लेकर कार्रवाई की जाएगी। अंचलाधिकारी को मापी कराने के आदेश दिए गए हैं। जहां-जहां अतिक्रमण है, उसको निश्चित रूप से हटाया जाएगा। - संजय कुमार, एसडीओ, गोगरी")
ऐतिहासिक संदर्भ (Context)
बिहार में तटबंधों का टूटना और बाढ़ से होने वाली तबाही एक नियमित त्रासदी है, जिसका सबसे बड़ा कारण इन तटबंधों का कमजोर होना और अतिक्रमण है। यह सिर्फ एक स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन और आजीविका से जुड़ा प्रश्न है। एक जन-प्रतिनिधि के रूप में इस संभावित आपदा को पहले ही भांप लेना और प्रशासन को लिखित रूप में आगाह करना, नवल किशोर सिंह की दूरदर्शी सोच और 'ग्राम-एक्टिविस्ट' के तौर पर उनकी व्यापक जिम्मेदारी को प्रमाणित करता है।
अपनी आवाज़ उठाएं, हम साथ हैं!
किसी भी ग्राम पंचायत की समस्या, भ्रष्टाचार या अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए प्रमाण (Proofs) के साथ नवल किशोर सिंह को सीधे ईमेल करें:
mail@nksingh.in
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