बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो पूरे देश में हो सकती हैं, लेकिन कहीं-कहीं किसी एक जगह ही होती हैं। बाकी लोगों के लिए वो सिर्फ सपना बनकर रह जाती हैं।
नमस्कार, मैं हूँ बिहार का पहला "डिजिटल इकोसिस्टम अडॉप्ट करने वाला" डिजिटल सरपंच नवल किशोर सिंह उर्फ़ एन के सिंह!
मैंने एक हफ्ता पहले खगड़िया जिले के सिविल सर्जन महोदय को प्रशासन की आधिकारिक डायरेक्टरी में दिए गए nic.in वाले ईमेल आईडी पर अपना आधिकारिक ईमेल mail@nksingh.in डोमेन होल्ड होने के विवशता में मिन्हाज़ जी के आधिकारिक ईमेल mail@minhazbharti.com के जरिये ईमेल कर मार्गदर्शन माँगा। साथ ही फोन पर भी आग्रह किया कि अगर जवाब मिल जाए तो हम समय से पहले लोगों को रक्तदान शिविर (23 मार्च, शहीद दिवस) के लिए मोटिवेट कर सकें।
[Image 1: ईमेल भेजने का प्रूफ — mail@nksingh.in से nic.in पर भेजा गया मेल]लेकिन मुझे कोई उत्तर नहीं मिला। सोमवार को फिर फोन करके याद दिलाया तो सिविल सर्जन साहब ने कहा — “आज बड़ा बाबू से रिप्लाई भिजवा देंगे।” फिर भी कोई जवाब नहीं आया।
कल दिनांक 18 मार्च 2026 को मैं अपने सहयोगी मयंक जी के साथ खगड़िया सदर पहुँचा। वहाँ पता चला कि
साथ ही संसद के सबसे अधिक सक्रिय सदस्य का अवार्ड प्राप्त
[Image 2: खगड़िया सदर में स्थिति दिखाती फोटो — डायरेक्टरी और ऑफिस की तस्वीर]
मेरा विश्लेषण और जांच बहुत विस्तृत है, लेकिन फिलहाल मैं सिर्फ इसी एक विषय को संज्ञान में दे रहा हूँ। इससे पहले मैंने .in डोमेन के मुद्दे पर भी दो हफ्ते पहले एक विस्तृत थ्रेड लिखा था।निराशा सिर्फ यह है कि व्यवस्था में बैठे लोग या व्यवस्था से सवाल करने की ताकत रखने वाले सम्मानित व्यक्ति मेरी मौखिक शिकायतों को “बेकार की बात” कहकर टाल देते हैं।
इस तकनीकी बेरुखी के कारण हमारा #रक्तदान अभियान पीछे चला गया।
खगड़िया जिला प्रशासन अच्छी तरह जानता है कि बिना सुनियोजित अभियान के लाखों की आबादी वाले जिले में कुछ सौ लोग भी रक्तदान के लिए तैयार नहीं होते।रक्तदान से लेकर Digital India तक की सच्चाई उजागर करना मेरा कर्तव्य है।अगर सरकार इस पर उचित कार्यवाही करेगी तो मुझे पूरा यकीन है कि खगड़िया जिला प्रशासन न सिर्फ एक नया अध्याय लिखेगा, बल्कि पूरे बिहार में एक अद्भुत रिकॉर्ड भी कायम करेगा।#जागो_सरकार
#डिजिटल_क्रांतिग्राम एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह
बिहार के पहले डिजिटल सरपंच
सरपंच, बोरना पंचायत, खगड़िया
मेल: mail@nksingh.in
वेबसाइट: www.nksingh.in
नमस्कार, मैं हूँ बिहार का पहला "डिजिटल इकोसिस्टम अडॉप्ट करने वाला" डिजिटल सरपंच नवल किशोर सिंह उर्फ़ एन के सिंह!
मैंने एक हफ्ता पहले खगड़िया जिले के सिविल सर्जन महोदय को प्रशासन की आधिकारिक डायरेक्टरी में दिए गए nic.in वाले ईमेल आईडी पर अपना आधिकारिक ईमेल mail@nksingh.in डोमेन होल्ड होने के विवशता में मिन्हाज़ जी के आधिकारिक ईमेल mail@minhazbharti.com के जरिये ईमेल कर मार्गदर्शन माँगा। साथ ही फोन पर भी आग्रह किया कि अगर जवाब मिल जाए तो हम समय से पहले लोगों को रक्तदान शिविर (23 मार्च, शहीद दिवस) के लिए मोटिवेट कर सकें।
[Image 1: ईमेल भेजने का प्रूफ — mail@nksingh.in से nic.in पर भेजा गया मेल]लेकिन मुझे कोई उत्तर नहीं मिला। सोमवार को फिर फोन करके याद दिलाया तो सिविल सर्जन साहब ने कहा — “आज बड़ा बाबू से रिप्लाई भिजवा देंगे।” फिर भी कोई जवाब नहीं आया।
कल दिनांक 18 मार्च 2026 को मैं अपने सहयोगी मयंक जी के साथ खगड़िया सदर पहुँचा। वहाँ पता चला कि
@KhagariaDm
की आधिकारिक डायरेक्टरी में दर्ज सिविल सर्जन के nic.in ईमेल का एक्सेस न तो सिविल सर्जन साहब के पास है और न ही उनके ऑफिस में!खगड़िया सिविल सर्जन कार्यालय आज भी अनऑफिशियल rediffmail का इस्तेमाल कर रहा है।मेरा सीधा सवाल है आदरणीय @AshwiniVaishnaw
जी से और @GoI_MeitY
से —जब MeitY का ₹21,633 करोड़ (2026-27) और NIC का ₹1,595 करोड़ का बजट खर्च होने के बावजूद 2026 में भी ये बुनियादी स्टैंडर्ड सख्ती से लागू नहीं हो रहा, तो हम Digital India और @PMOIndia
का अभियान कैसे पूरा कर सकते हैं?जो छोटी-छोटी चीजें हमारे बुनियाद और वजूद को परिभाषित करती हैं, उन्हें लागू करने में कहाँ से रोड़ा अटकाया जा रहा है?मैं अपने सांसद @Rajeshverma_LJP (राजेश वर्मा)
जी से भी आग्रह करता हूँ कि वे इस मामले में संज्ञान लें और तुरंत सभी सरकारी कार्यालयों को निर्देश दें कि भारत सरकार के आधिकारिक nic.in या gov.in ईमेल को ही सार्वजनिक संवाद का मानक बनाया जाए।साथ ही संसद के सबसे अधिक सक्रिय सदस्य का अवार्ड प्राप्त
@pappuyadavjapl
(माननीय पप्पू यादव जी) से भी निवेदन है — आप जिस तरह लोक और जन के मुद्दे उठाते हैं, यह विषय राष्ट्र की समग्र सक्रिय चेतना पर सवालिया निशान खड़ा करता है।ट्विटर के मशहूर एक्टिविस्ट @khurpenchh
(खुरपेंच) जी से भी आग्रह है कि यदि आप इस मामले को गंभीरता से उठाएंगे तो पूरा तंत्र सुनने को मजबूर हो जाएगा।[Image 2: खगड़िया सदर में स्थिति दिखाती फोटो — डायरेक्टरी और ऑफिस की तस्वीर]
मेरा विश्लेषण और जांच बहुत विस्तृत है, लेकिन फिलहाल मैं सिर्फ इसी एक विषय को संज्ञान में दे रहा हूँ। इससे पहले मैंने .in डोमेन के मुद्दे पर भी दो हफ्ते पहले एक विस्तृत थ्रेड लिखा था।निराशा सिर्फ यह है कि व्यवस्था में बैठे लोग या व्यवस्था से सवाल करने की ताकत रखने वाले सम्मानित व्यक्ति मेरी मौखिक शिकायतों को “बेकार की बात” कहकर टाल देते हैं।
इस तकनीकी बेरुखी के कारण हमारा #रक्तदान अभियान पीछे चला गया।
खगड़िया जिला प्रशासन अच्छी तरह जानता है कि बिना सुनियोजित अभियान के लाखों की आबादी वाले जिले में कुछ सौ लोग भी रक्तदान के लिए तैयार नहीं होते।रक्तदान से लेकर Digital India तक की सच्चाई उजागर करना मेरा कर्तव्य है।अगर सरकार इस पर उचित कार्यवाही करेगी तो मुझे पूरा यकीन है कि खगड़िया जिला प्रशासन न सिर्फ एक नया अध्याय लिखेगा, बल्कि पूरे बिहार में एक अद्भुत रिकॉर्ड भी कायम करेगा।#जागो_सरकार
#डिजिटल_क्रांतिग्राम एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह
बिहार के पहले डिजिटल सरपंच
सरपंच, बोरना पंचायत, खगड़िया
मेल: mail@nksingh.in
वेबसाइट: www.nksingh.in

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