ग्राम एक्टिविस्ट नवल की तफ्दिश: रक्तदान अभियान की तैयारी में #डिजिटलइंडिया की खुली पोल!

जमीनी पड़ताल • सार्वजनिक जवाबदेही

बहुत सारी ऐसी सकारात्मक चीजें हैं जो पूरे देश में हो सकती हैं, लेकिन कहीं-कहीं किसी एक जगह ही होती हैं। मैं हूँ बिहार का पहला "डिजिटल सरपंच" नवल किशोर सिंह। 23 मार्च 2026 के प्रस्तावित रक्तदान अभियान की तैयारी के दौरान मुझे खगड़िया सिविल सर्जन कार्यालय की एक ऐसी गंभीर डिजिटल खामी मिली, जो करोड़ों के 'Digital India' अभियान की जमीनी सच्चाई उजागर करती है।

रिपोर्ट तिथि: 19 मार्च 2026 मैदानी पड़ताल: 18 मार्च 2026 स्थान: खगड़िया, बिहार
मुख्य मुद्दा

खगड़िया सिविल सर्जन कार्यालय के पास भारत सरकार के आधिकारिक nic.in ईमेल का एक्सेस ही नहीं है। वे आज भी मानक प्रोटोकॉल के विपरीत 'rediffmail' का इस्तेमाल कर रहे हैं।

तत्काल असर

इस प्रशासनिक सुस्ती के कारण 23 मार्च (शहीद दिवस) के रक्तदान अभियान की अनुमति और जन-जागरूकता का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ।

सीधा सवाल

जब MeitY और NIC का हज़ारों करोड़ का बजट है, तो जिला-स्तर पर बुनियादी डिजिटल संवाद इतना कमज़ोर क्यों है?

मामला कैसे शुरू हुआ?

मैंने एक हफ्ता पहले खगड़िया जिले के सिविल सर्जन महोदय को प्रशासन की आधिकारिक डायरेक्टरी (nic.in) में दिए गए ईमेल आईडी पर अपना आधिकारिक ईमेल mail@nksingh.in डोमेन होल्ड होने की विवशता में मिन्हाज़ जी के आधिकारिक ईमेल mail@minhazbharti.com के जरिये ईमेल कर मार्गदर्शन माँगा। साथ ही फोन पर भी आग्रह किया कि अगर जवाब मिल जाए तो हम समय से पहले लोगों को रक्तदान शिविर के लिए मोटिवेट कर सकें।

खगड़िया सिविल सर्जन कार्यालय को भेजे गए ईमेल का साक्ष्य
Image 1: ईमेल भेजने का प्रूफ — mail@nksingh.in से nic.in पर भेजा गया आधिकारिक मेल (जिसका कोई जवाब नहीं आया)

18 मार्च की जमीनी पड़ताल और 'Digital India' की हकीकत

मुझे कोई उत्तर नहीं मिला। सोमवार को फोन करने पर आश्वासन मिला कि “आज बड़ा बाबू से रिप्लाई भिजवा देंगे।” फिर भी सन्नाटा रहा। कल दिनांक 18 मार्च 2026 को मैं स्वयं खगड़िया सदर पहुँचा। वहाँ पता चला कि आधिकारिक डायरेक्टरी में दर्ज सिविल सर्जन के nic.in ईमेल का एक्सेस न तो सिविल सर्जन साहब के पास है और न ही उनके ऑफिस में!

खगड़िया सदर अस्पताल सिविल सर्जन कार्यालय की स्थिति दिखाती नवल किशोर सिंह की पड़ताल तस्वीर
Image 2: 18 मार्च 2026 को खगड़िया सदर (सिविल सर्जन कार्यालय) में स्वयं पहुँचकर स्थिति की पड़ताल
"जब MeitY का ₹21,633 करोड़ और NIC का ₹1,595 करोड़ का बजट खर्च होने के बावजूद 2026 में भी ये बुनियादी स्टैंडर्ड सख्ती से लागू नहीं हो रहा, तो हम PMO के 'Digital India' अभियान को कैसे पूरा कर सकते हैं?"

खगड़िया सिविल सर्जन कार्यालय आज भी सरकारी मानकों के बाहर जाकर rediffmail का इस्तेमाल कर रहा है। मैं अपने सांसद राजेश वर्मा जी और सांसद पप्पू यादव जी से भी आग्रह करता हूँ कि वे इस मामले में संज्ञान लें और तुरंत सभी सरकारी कार्यालयों को निर्देश दें कि भारत सरकार के आधिकारिक nic.in या gov.in ईमेल को ही सार्वजनिक संवाद का मानक बनाया जाए।

निराशा सिर्फ यह है कि व्यवस्था में बैठे लोग मेरी मौखिक शिकायतों को “बेकार की बात” कहकर टाल देते हैं। इस तकनीकी बेरुखी के कारण हमारा रक्तदान अभियान पीछे चला गया। बिना सुनियोजित अभियान के लाखों की आबादी वाले जिले में कुछ सौ लोग भी रक्तदान के लिए तैयार नहीं होते।

प्रमाण और मूल X (Twitter) थ्रेड

त्वरित प्रश्न (FAQ)

इस रिपोर्ट का मुख्य दावा क्या है?

खगड़िया सिविल सर्जन कार्यालय के लिए सूचीबद्ध आधिकारिक nic.in ईमेल कार्यशील रूप में उपलब्ध नहीं था, वे सरकारी मानकों के विपरीत 'rediffmail' का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे सार्वजनिक संवाद और 23 मार्च के रक्तदान अभियान की तैयारी प्रभावित हुई।

रक्तदान अभियान पर वास्तविक असर क्या पड़ा?

समय पर मार्गदर्शन और अनुमति न मिलने से रक्तदान अभियान की तैयारी, डिजिटल जागरूकता और संभावित भागीदारी बुरी तरह प्रभावित हुई।

मैंने यह सामग्री पहले X (Twitter) पर एक विस्तृत थ्रेड के रूप में लिखी थी। यहां उसे क्रमबद्ध, साक्ष्य-आधारित और पाठक-अनुकूल रूप में रखा गया है, ताकि यह रिकॉर्ड, जन-जागरूकता और जवाबदेही—तीनों उद्देश्यों की पूर्ति कर सके।

नवल किशोर सिंह (एन. के. सिंह)
ग्राम एक्टिविस्ट • डिजिटल सरपंच • खगड़िया

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किसी भी ग्राम पंचायत की समस्या, भ्रष्टाचार या अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए प्रमाण (Proofs) के साथ नवल किशोर सिंह को सीधे ईमेल करें:

mail@nksingh.in

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