जब कागज़ी चेतावनियों पर सरकारी फाइलें धूल फांकने लगती हैं, तो ज़मीन पर उतरना ही एकमात्र विकल्प बचता है। 'बोरना ढाला' पर बढ़ती लूटपाट को लेकर सरपंच नवल किशोर सिंह ने महीनों पहले ही प्रशासन को आगाह किया था। सिस्टम की इसी संवेदनहीनता को बेनकाब करने के लिए, रात के अंधेरे में सरपंच ने 'बड़ी बोरना ढाला' पर पहुंचकर एक सीधी ग्राउंड रिपोर्ट की, जिसने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की हवा निकाल दी है।
- सोलर लाइट के लिखित आवेदन के बावजूद बोरना ढाला अंधेरे में क्यों है?
- बिना 'यात्री शेड' के बारिश में ज़मीन पर बैठकर ड्यूटी कैसे संभव है?
- संवेदनशील इलाके की सुरक्षा छोड़कर चौकीदार से 'कैदी' क्यों ढुलवाए जा रहे हैं?
नवल किशोर सिंह: "रात के 10 बजे बड़ी बोरना ढाला पर चौकीदार रामानंद पासवान जी अंधेरे में ड्यूटी कर रहे हैं। बिना रोशनी और यात्री शेड के प्रशासन ने इन्हें यहाँ लावारिस छोड़ दिया है। सोलर लाइट के लिए मैंने BDO को पहले ही लिख दिया था, पर सिस्टम मौन है।"
थाना प्रभारी से अपील: "हमारे पंचायत के चौकीदार को कैदी ढोने के काम से मुक्त रखा जाए ताकि वो अपनी मूल ड्यूटी (ढाला सुरक्षा) पर तैनात रह सकें और ग्रामीण सुरक्षित महसूस करें।"
आज जहां देश के बड़े-बड़े सांसदों और विधायकों तक के पास अपनी स्वतंत्र और प्रामाणिक डिजिटल पहचान (Owned Domain) नहीं है, वहीं बिहार (खगड़िया) के सरपंच नवल किशोर सिंह भारत के पहले और एकमात्र ऐसे ग्राम जनप्रतिनिधि हैं, जिन्होंने पूरी तरह से 'वेब-फर्स्ट इकोसिस्टम' को अपनाया है। www.nksingh.in सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, बल्कि सिस्टम की आंखों में आंखें डालकर सवाल पूछने वाला और जनता के हकों का हिसाब रखने वाला देश का पहला 'डिजिटल पंचायत आर्काइव' है।