🚨 BDO गोगरी के संज्ञान में: चिलचिलाती धूप और बारिश में कब तक पिसेंगे लोग?
खगड़िया के छोटी बौरना ढाला और बड़ी बौरना ढाला पर हर दिन सैकड़ों राहगीरों का आना-जाना होता है, लेकिन वहाँ सुस्ताने या छांव के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। सबसे गंभीर बात यह है कि इन दोनों ढाला पर ड्यूटी के लिए 'चौकीदार' भी नियुक्त हैं, जिन्हें चिलचिलाती धूप और भारी बारिश में खुले आसमान के नीचे खड़ा रहना पड़ता है। इस अमानवीय स्थिति और जनहित को ध्यान में रखते हुए, सरपंच नवल किशोर सिंह ने प्रखण्ड विकास पदाधिकारी (BDO), गोगरी को तत्काल 'यात्री शेड' और 'तोरण द्वार' के निर्माण के लिए एक सख्त आधिकारिक पत्र सौंपा है।
सिर्फ कागजी मांग नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई पर जोर देते हुए सरपंच नवल किशोर सिंह ने 2 मई 2026 को यह पत्र सीधे BDO कार्यालय में ऑफिशियली रिसीव (प्राप्त) करवाया है। प्रशासन को लिखे गए इस पत्र में स्पष्ट रूप से ध्यान दिलाया गया है कि यात्री शेड बनने से न सिर्फ आम राहगीरों को राहत मिलेगी, बल्कि ड्यूटी पर मुस्तैद चौकीदारों को भी सिर छुपाने और बैठने की एक सम्मानजनक जगह मिल सकेगी।
तस्वीर 02 : प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, गोगरी कार्यालय में मुहर (Receiving) के साथ पत्र प्रस्तुत करते सरपंच नवल किशोर सिंह — दिनांक: 02.05.2026
पत्र का मूल पाठ (Official Letter Transcript):
Gram Kachahari, Borna
Block - Gogri, Dist. - Khagaria, Bihar
पत्रांक (Ref. No.): 91/26 दिनांक: 02.05.2026
सेवा में,
श्री मान् प्रखण्ड विकास पदाधिकारी महोदय,
गोगरी
विषय:- छोटी बौरना ढाला, एवं बड़ी बौरना ढाला पर यात्री शेड एवं तोरन द्वार बनवाने के संबंध में।
महाशय,
विनय पुर्वक कहना है कि छोटी बौरना ढाला एवं बड़ी बौरना ढाला पर आते-जाते लोगों को बैठने की सुविधा के लिए यात्री शेड एवं तोरन द्वार की अतिआवश्यकता है। ये दोनों ढाला पर चौकिदार भी नियुक्त है। उनलोगों को भी बैठने की सुविधा मिल जायेगा, तथा बारिश का भी बचाव होगा।
अतः श्री मान् से नम्र निवेदन है कि यात्री सेड एवं तोरन द्वार जल्द से जल्द निर्माण करने की कृपा की जाय। धन्यवाद।
आपका भवदीय
(हस्ताक्षर) सरपंच
ग्राम कचहरी, बौरना, प्रखण्ड गोगरी (खगड़िया)
02/05/2026
सम्पादकीय टिप्पणी: विकास की फाइलों में दबे बुनियादी मानवाधिकार
यह आधिकारिक पत्र महज एक सरकारी 'मांग' नहीं है, बल्कि सिस्टम के उस अमानवीय चेहरे पर एक कड़ा प्रहार है जो अक्सर निचले स्तर के कर्मचारियों को अनदेखा कर देता है। सरपंच नवल किशोर सिंह द्वारा उठाई गई यह चिंता सिर्फ एक 'यात्री शेड' के निर्माण की नहीं है, बल्कि एक जनप्रतिनिधि की उस गहरी संवेदना को दर्शाती है जो सिस्टम को यह याद दिला रही है कि विकास का असली अर्थ आम आदमी के अधिकारों की रक्षा करना है।
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आज जहां देश के जनप्रतिनिधियों के पास स्वतंत्र डिजिटल पहचान नहीं है, वहीं बिहार के सरपंच नवल किशोर सिंह भारत के पहले और एकमात्र 'वेब-फर्स्ट' जनप्रतिनिधि हैं। www.nksingh.in जनता के हकों का हिसाब रखने वाला देश का पहला 'डिजिटल पंचायत आर्काइव' है।