खगड़िया की जमीनी हकीकत: ठठा पंचायत में करोड़ों की नल-जल योजना दम तोड़ रही है, सड़कें टूटीं और ग्रामीण आज भी पानी को तरस रहे हैं


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रिपोर्ट: एन. के. सिंह | ग्राम एक्टिविस्ट | Digital Sarpanch
प्रकाशन: nksingh.in

सरकारी फाइलों में योजनाएँ पूरी दिख सकती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। खगड़िया जिले के मानसी प्रखंड अंतर्गत ठठा पंचायत के वार्ड संख्या 1, 13 एवं 14 में हर घर नल का जल योजना आज भी अपने मूल उद्देश्य से काफी दूर दिखाई दे रही है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पीएचडी विभाग द्वारा पाइपलाइन बिछाने के लिए वर्षों पहले कई सड़कों को खोद दिया गया था। पाइपलाइन बिछने के बाद विभाग ने सड़क की मरम्मत कराना जरूरी नहीं समझा। आज भी जगह-जगह टूटी और जर्जर सड़कें विभागीय लापरवाही की गवाही दे रही हैं। बरसात के मौसम में इन सड़कों पर कीचड़ और जलजमाव के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों को प्रतिदिन परेशानी उठानी पड़ रही है।

इससे भी अधिक गंभीर विषय यह है कि जिन वार्डों में करोड़ों रुपये खर्च कर नल-जल योजना लागू की गई, वहां के लोगों को वर्षों से नियमित शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है। कई परिवार आज भी चापाकल, निजी बोरिंग अथवा अन्य स्रोतों पर निर्भर हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब पानी ही नहीं पहुँच रहा, तो योजना का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है?

ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाई गई, लेकिन समाधान के बजाय केवल आश्वासन ही मिलता रहा। यदि वर्षों तक न सड़क की मरम्मत हो और न ही जलापूर्ति बहाल हो, तो यह विभागीय निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

एन. के. सिंह (ग्राम एक्टिविस्ट एवं सरपंच, ग्राम कचहरी बोरना) का कहना है कि विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल बजट खर्च करना नहीं, बल्कि जनता तक उसका वास्तविक लाभ पहुँचाना है। यदि किसी पंचायत में वर्षों तक लोग शुद्ध पेयजल से वंचित रहें और सड़कें बदहाल बनी रहें, तो संबंधित विभाग को इसकी जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।

उन्होंने पीएचडी विभाग से मांग की है कि ठठा पंचायत के वार्ड संख्या 1, 13 एवं 14 का अविलंब स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, नल-जल योजना को नियमित रूप से चालू कराया जाए, पाइपलाइन बिछाने के बाद छोड़ी गई क्षतिग्रस्त सड़कों की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराई जाए तथा यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मी या कार्य एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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