24 घंटे ब्लैकआउट! महेशखूंट PSS की घोर लापरवाही पर अधीक्षण अभियंता (NBPDCL) को लिखित शिकायत

📍 स्थान: महेशखूंट PSS, खगड़िया (NBPDCL)
📅 पत्रांक / दिनांक: 119/26 | 06 जुलाई 2026
📝 प्रेषक: नवल किशोर सिंह (सरपंच एवं ग्राम एक्टिविस्ट)
🆔 Case Record ID: NKS-COMPLAINT-2026-MAHESHKHUNT-PSS-119-26
📜 Primary Evidence: Official Complaint Letter to Superintending Engineer (NBPDCL)
🏛️ Linked Public Service: NBPDCL Power Supply & Maintenance
📌 Record Status: Active Complaint & Administrative Tracking
24 घंटे बिजली गुल रहने पर महेशखूंट PSS के खिलाफ NBPDCL बेगूसराय को शिकायत पत्र दिखाते ग्राम कचहरी बोरना के सरपंच नवल किशोर सिंह।
तस्वीर 01 : 📸 24 घंटे बिजली गुल रहने पर महेशखूंट PSS के खिलाफ NBPDCL को शिकायत पत्र दिखाते सरपंच नवल किशोर सिंह। अपनी पंचायत की भौगोलिक सीमाओं को तोड़कर, एक सरपंच के लेटरहेड और कलम को पूरे ज़िले की जनता का हथियार बनाते हुए।

जब व्यवस्था गहरी नींद में सो रही हो, तो उसे जगाने के लिए सिर्फ कागज़ी औपचारिकताएं काफी नहीं होतीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर कड़ा विरोध दर्ज कराना पड़ता है। खगड़िया जिले के महेशखूंट पावर सब-स्टेशन (PSS) के अंतर्गत आने वाले हज़ारों उपभोक्ताओं ने हाल ही में जिस घोर लापरवाही का सामना किया है, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है।

लगातार 24 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रहने और अधिकारियों की संवेदनहीनता के खिलाफ ग्राम कचहरी बोरना के सरपंच एवं ग्राम एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह ने सीधा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने 06 जुलाई 2026 को अधीक्षण अभियंता (विद्युत), NBPDCL बेगूसराय सर्किल को पत्र लिखकर इस मामले में उच्चस्तरीय दखल की मांग की है।

🔴 24 घंटे का ब्लैकआउट और अधिकारियों की चुप्पी

महेशखूंट PSS का इतिहास रहा है कि यहाँ नियमित रखरखाव (Maintenance) के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। नतीजा यह है कि हल्की सी बारिश या मामूली तकनीकी खराबी आते ही फीडर घंटों के लिए बंद कर दिया जाता है।

स्थिति तब बर्दाश्त से बाहर हो गई जब पूरे इलाके को लगभग 24 घंटे तक अंधेरे में धकेल दिया गया। इस अघोषित 'ब्लैकआउट' ने न सिर्फ आम घरेलू जनजीवन को अस्त-व्यस्त किया, बल्कि व्यापार, कृषि कार्यों, विद्यार्थियों की पढ़ाई और पेयजल आपूर्ति जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को भी पूरी तरह पंगु बना दिया। सबसे निराशाजनक बात यह रही कि संकट की इस घड़ी में संबंधित कनीय अभियंता (JE) का मोबाइल फोन लगातार बंद मिला और अन्य ज़िम्मेदार अधिकारियों ने जनता से संवाद करना ज़रूरी नहीं समझा।

🟢 अधीक्षण अभियंता को कड़ा पत्र: प्रमुख मांगें

जनप्रतिनिधि होने के नाते नवल किशोर सिंह ने जनता के इस आक्रोश को सीधे NBPDCL के उच्चाधिकारियों तक पहुँचाया है। पत्रांक 119/26 के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट तौर पर निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • निष्पक्ष जांच: महेशखूंट PSS की लचर कार्यप्रणाली और बार-बार हो रहे ब्रेकडाउन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
  • मेंटेनेंस की स्थायी व्यवस्था: कागज़ों के बजाय ज़मीन पर समयबद्ध और प्रभावी मेंटेनेंस लागू किया जाए।
  • जवाबदेही और कार्रवाई: फोन बंद रखने वाले और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों को चिन्हित कर उन पर सख्त विभागीय कार्रवाई हो।
  • निर्बाध आपूर्ति: क्षेत्र के उपभोक्ताओं को उनका हक़—यानी निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली—तत्काल सुनिश्चित की जाए।

💡 विज़न: 'कुर्सी' सीमित है, पर 'कलम' की कोई सीमा नहीं

अक्सर बिहार में सरपंच पद को केवल स्थानीय और पारिवारिक विवादों के निपटारे तक सीमित मान लिया जाता है। लेकिन नवल किशोर सिंह ने इस मिथक को तोड़ा है। प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों के अभाव के बावजूद, उन्होंने अपने संवैधानिक पद, सरकारी लेटरहेड (Letterhead) और सूचना के अधिकार (RTI) को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। उनकी लड़ाई सिर्फ बोरना पंचायत की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। खगड़िया जिले में जहाँ भी व्यवस्था सो रही है, वहाँ एक 'ग्राम एक्टिविस्ट' के रूप में उनकी कलम चलती रहेगी।

✊ जनहित के लिए संघर्ष जारी रहेगा

ग्राम एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह पिछले कई वर्षों से गोगरी और बोरना पंचायत में सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर प्रशासन की जवाबदेही तय करते आए हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि शिकायत दर्ज कराना सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था को सुधारने की एक सतत लड़ाई है।

बिजली, पानी और सड़क जनता का एहसान नहीं, उनका मौलिक अधिकार है। समस्याओं पर पर्दा डालना अधिकारियों की आदत हो सकती है, लेकिन उन्हें समाधान तक खींचकर ले जाना एक ग्राम एक्टिविस्ट का वास्तविक दायित्व है। जब तक महेशखूंट PSS की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होता, हमारी यह लड़ाई जारी रहेगी।

— नवल किशोर सिंह (सरपंच, ग्राम कचहरी बोरना)

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