मदारपुर पंचायत के गोविंदपुर वार्ड संख्या-10 में वर्षों से बंद पड़ा PHED का जल मीनार अब फिर से लोगों की प्यास बुझाने लगा है। ग्रामीणों की शिकायत पर ग्राम एक्टिविस्ट एनके सिंह ने विभागीय स्तर पर पहल की और कुछ ही दिनों में जलापूर्ति व्यवस्था को दोबारा चालू कराया।
मदारपुर पंचायत के गोविंदपुर वार्ड संख्या-10 के लोगों के लिए वर्षों से बंद पड़ा PHED का जल मीनार केवल एक खराब पंप या बंद पानी की टंकी नहीं थी, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी एक बड़ी समस्या थी। जल मीनार खराब होने के कारण लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा था। कई परिवार पानी खरीदकर पीने को मजबूर थे, जबकि कुछ लोग दूर-दराज से पानी लाकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे थे।
जल मीनार के ऑपरेटर दिलीप कुमार यादव ने भी कई बार विभागीय स्तर पर समस्या की जानकारी दी, लेकिन लंबे समय तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।
25 सितंबर को एनके सिंह तक पहुंची ग्रामीणों की आवाज
25 सितंबर 2026 को गोविंदपुर वार्ड संख्या-10 के कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने एनके सिंह, ग्राम एक्टिविस्ट एवं सरपंच, बोरना, गोगरी, खगड़िया को फोन के माध्यम से जल मीनार की समस्या से अवगत कराया।
ग्रामीणों की बात सुनने के बाद एनके सिंह ने मामले को केवल एक शिकायत मानकर छोड़ नहीं दिया। एनके सिंह ने संबंधित विभागीय अधिकारी से संपर्क करने का निर्णय लिया और PHED विभाग के जेई कुंदन कुमार को फोन पर पूरी समस्या की जानकारी दी।
एनके सिंह ने विभाग के सामने यह बात रखी कि गोविंदपुर वार्ड संख्या-10 के लोगों को लंबे समय से पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है और बंद पड़े जल मीनार को जल्द से जल्द ठीक कराया जाना चाहिए।
30 सितंबर को पहुंचा विभागीय मिस्त्री
एनके सिंह की पहल के बाद 30 सितंबर 2026 को PHED विभाग का मिस्त्री गोविंदपुर वार्ड संख्या-10 स्थित जल मीनार पर पहुंचा।
जब जल मीनार के ऑपरेटर दिलीप कुमार यादव ने विभागीय मिस्त्री को मौके पर पहुंचकर जल मीनार की खराबी दूर करते देखा, तो उन्हें भी कुछ समय के लिए विश्वास नहीं हुआ कि जिस समस्या को लेकर वे स्वयं कई बार विभाग से शिकायत कर चुके थे, उसके समाधान के लिए आखिरकार विभागीय मिस्त्री उनके सामने खड़ा है।
दिलीप कुमार यादव ने मिस्त्री को जल मीनार से जुड़ी सभी समस्याओं की जानकारी दी। इसके बाद मिस्त्री ने एक-एक करके खराबी की जांच शुरू की।
तीन दिनों तक चला मरम्मत का काम
जल मीनार में केवल पंप की समस्या ही नहीं थी। जांच के दौरान फिल्टर, पाइप लाइन में लीकेज और कई घरों तक पानी के कनेक्शन से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं।
PHED के मिस्त्री ने लगभग तीन दिनों तक मौके पर रहकर काम किया और जल मीनार से जुड़ी विभिन्न तकनीकी समस्याओं को दूर किया।
आखिरकार 2 अक्टूबर 2026 को मरम्मत का काम पूरा किया गया।
और फिर आया 3 अक्टूबर 2026, जब गोविंदपुर वार्ड संख्या-10 के लोगों को लंबे इंतजार के बाद दोबारा अपने जल मीनार से शुद्ध पेयजल मिलना शुरू हुआ।
एक शिकायत, एक पहल और हजारों उम्मीदें
जलापूर्ति शुरू होने के बाद गोविंदपुर के लोगों में खुशी का माहौल है। जिन लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ता था, उन्हें अब राहत मिली है। जिन परिवारों को दूसरे स्थानों से पानी लाना पड़ता था, उनकी परेशानी भी कम हुई है।
इस पूरी घटना की शुरुआत किसी बड़े कार्यक्रम से नहीं, बल्कि 25 सितंबर को ग्रामीणों के एक फोन कॉल से हुई थी।
ग्रामीणों ने अपनी समस्या एनके सिंह ग्राम एक्टिविस्ट तक पहुंचाई। एनके सिंह ने समस्या को गंभीरता से लिया, संबंधित PHED जेई कुंदन कुमार से संपर्क किया और विभाग के सामने ग्रामीणों की समस्या रखी। इसके बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई हुई और वर्षों से बंद जल मीनार फिर से चालू हो सका।
यह घटना यह भी दिखाती है कि जब कोई व्यक्त ग्रामीणों की समस्याओं को केवल सुनता ही नहीं, बल्कि उन्हें संबंधित विभाग तक पहुंचाकर समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की पहल करता है, तो उसका असर जमीन पर दिखाई देता है।
एनके सिंह का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र की छोटी से छोटी समस्या भी लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। इसलिए जहां भी ग्रामीण अपनी समस्या लेकर पहुंचते हैं, वहां संबंधित विभाग और अधिकारियों तक बात पहुंचाना और समाधान के लिए पहल करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।
गोविंदपुर वार्ड संख्या-10 का यह जल मीनार अब केवल पानी की टंकी नहीं रह गया है। यह ग्रामीणों की उस उम्मीद का उदाहरण बन गया है कि समस्या बताने के बाद अगर कोई जिम्मेदार व्यक्ति पहल करे और संबंधित विभाग तक लगातार बात पहुंचाए, तो वर्षों से लंबित समस्या का समाधान भी संभव है।
25 सितंबर को ग्रामीणों की आवाज एनके सिंह तक पहुंची,
30 सितंबर को विभागीय मिस्त्री मौके पर पहुंचा,
2 अक्टूबर को मरम्मत पूरी हुई,
और 3 अक्टूबर से गोविंदपुर वार्ड संख्या-10 में फिर से शुद्ध पेयजल मिलने लगा।
यह कहानी है ग्रामीणों की आवाज, एनके सिंह की पहल और विभागीय कार्रवाई के परिणाम की।
“एनके सिंह की पहल से समाधान तक”