कागजों पर आश्वासन, जमीन पर सन्नाटा! आवेदन पर आवेदन, लेकिन सड़कों की हालत जस की तस!
एन.के. सिंह, ग्राम एक्टिविस्ट एवं सरपंच, बोरना, गोगरी, खगड़िया, बिहार की RWD विभाग से दो टूक सवाल!
खगड़िया जिले के गोगरी क्षेत्र में सड़कों की बदहाली अब सिर्फ एक समस्या नहीं, बल्कि हजारों लोगों के दैनिक जीवन की परेशानी बन चुकी है। कहीं सड़क पर गड्ढों का राज है, तो कहीं जलजमाव ने रास्ते को तालाब बना दिया है। कहीं लोगों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है, तो कहीं सड़क की जर्जर हालत के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जनता की परेशानी को लेकर बार-बार आवेदन दिया जा रहा है, जब संबंधित अधिकारियों से बातचीत हो चुकी है, जब पूर्णिया के चीफ इंजीनियर तक सड़कों को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया जा चुका है, तो फिर धरातल पर काम की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है?
📍 इन सड़कों की बदहाली पर आखिर कब होगी कार्रवाई?
मदारपुर पंचायत के गोविंदपुर की सड़क — जर्जर हालत और जलजमाव से ग्रामीण परेशान हैं। आवागमन करना लोगों के लिए मुश्किल बनता जा रहा है।
बोरना ढाला से छोटी बोरना पंचायत भवन होते हुए बोरना मध्य विद्यालय तक की सड़क — इस मार्ग की स्थिति में सुधार की जरूरत है। सड़क की बदहाली का असर आम लोगों और विद्यार्थियों के आवागमन पर पड़ता है।
बड़ी बोरना ढाला से बड़ी भदलय होते हुए छोटी भदलय ढाला तक की सड़क — ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण इस मार्ग पर भी निर्माण अथवा मरम्मत की दिशा में ठोस पहल का इंतजार है।
महेशखूंट मछली बाजार से केशव चौक तक की सड़क — बाजार और आसपास के लोगों के आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण इस मार्ग की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है।
NH-107 खाड़ोधार ढाला से पकरैल बाजार तक की सड़क — इस मार्ग की बदहाली से परेशान लोगों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि काम शुरू होने की स्पष्ट स्थिति चाहिए।
NH-31 ठाठा से आदाबाड़ी तक की सड़क — इस मार्ग की स्थिति में सुधार के लिए भी विभाग को गंभीरता दिखानी चाहिए।
इन सभी सड़कों को लेकर एन.के. सिंह, ग्राम एक्टिविस्ट एवं सरपंच, बोरना की ओर से संबंधित विभाग को समय-समय पर आवेदन देकर समस्याओं से अवगत कराया गया है। उद्देश्य किसी अधिकारी पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं, बल्कि जनता की वास्तविक परेशानी को सामने लाकर उसका समाधान सुनिश्चित कराना है।
❓ आखिर हर बार नया आश्वासन, लेकिन काम कब?
जब सड़क निर्माण या मरम्मत की बात होती है, तो कभी कहा जाता है कि DPR तैयार हो रहा है, कभी संवेदक के आने की बात कही जाती है, तो कभी अधिकारियों से बातचीत जारी रहने का आश्वासन मिलता है।
लेकिन जनता का सवाल सीधा है—DPR से सड़क कब बनेगी? संवेदक की चर्चा से गड्ढे कब भरेंगे? और आश्वासन से जलजमाव की समस्या कब दूर होगी?
जनता को यह जानने का अधिकार है कि किस सड़क की स्वीकृति की स्थिति क्या है, किसका टेंडर हुआ है, किसका काम लंबित है और निर्माण कार्य शुरू होने की संभावित समय-सीमा क्या है।
यदि किसी सड़क के निर्माण में तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन है, तो विभाग को उसकी स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। लेकिन लोगों को अनिश्चितकाल तक इंतजार कराते रहना किसी समस्या का समाधान नहीं है।
✊ अब सवाल नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए!
एन.के. सिंह ने संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि सभी सूचीबद्ध सड़कों की स्थिति की समीक्षा की जाए, जरूरत के अनुसार स्थल निरीक्षण कराया जाए और प्रत्येक सड़क के लिए जिम्मेदार अधिकारी, कार्य की वर्तमान स्थिति तथा कार्रवाई की समय-सीमा स्पष्ट की जाए।
जहां तत्काल मरम्मत संभव है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सड़क को चलने योग्य बनाया जाए। जहां स्थायी निर्माण की जरूरत है, वहां लंबित प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा कर काम शुरू कराया जाए।
हमारा उद्देश्य किसी से टकराव करना नहीं, बल्कि जनता की आवाज को जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाना है। ग्राम एक्टिविस्ट के रूप में हमारा काम समस्याओं को देखना, लोगों की पीड़ा को सामने लाना, आवेदन देना और समाधान होने तक संबंधित विभाग से जवाब मांगना है।
लेकिन जब एक ही क्षेत्र में इतनी सारी सड़कें बदहाली का सामना कर रही हों, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि विकास की योजनाओं का लाभ आखिर आम जनता तक कब पहुंचेगा?
🔥 RWD विभाग से जनता के पांच सीधे सवाल
- सभी संबंधित सड़कों की वर्तमान स्थिति क्या है?
- किन सड़कों का DPR तैयार है और किनकी स्वीकृति लंबित है?
- किन सड़कों पर टेंडर या संवेदक की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है?
- तत्काल मरम्मत और स्थायी निर्माण कब शुरू होगा?
- क्या विभाग प्रत्येक सड़क के लिए स्पष्ट समय-सीमा सार्वजनिक करेगा?
जनता को बहाने नहीं, परिणाम चाहिए। कागजों पर योजनाएं नहीं, जमीन पर सड़क चाहिए। आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए!
हमारी मांग है कि संबंधित अधिकारी इन सड़कों को प्राथमिकता दें और जनता को स्पष्ट जवाब दें। सड़कें किसी अधिकारी की कृपा नहीं, बल्कि जनता की बुनियादी जरूरत हैं।
जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक जनता की आवाज उठती रहेगी।
✍️ एन.के. सिंह (N.K. Singh)
ग्राम एक्टिविस्ट एवं सरपंच
ग्राम कचहरी बोरना, प्रखंड गोगरी, जिला खगड़िया, बिहार
समस्या समाधान फाउंडेशन — जनसमस्याओं की आवाज, समाधान के लिए निरंतर प्रयास।