🎥 मूल रिकॉर्डिंग: 07 सितम्बर 2025 (जन-सुनवाई)
📘 प्रथम सार्वजनिक स्रोत: Facebook Video (@nksingh.in), 08 सितम्बर 2025
▶️ संरक्षित आर्काइव कॉपी: YouTube Video ID
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बिहार में बाढ़ हर साल आती है और अपने पीछे तबाही छोड़ जाती है। लेकिन असली तबाही तब शुरू होती है, जब बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए सरकार द्वारा भेजी गई 'जीआर राशि' (GR Rashi - अनुग्रह अनुदान) फाइलों और दफ्तरों के बीच कहीं गायब हो जाती है। खगड़िया जिले के गोगरी प्रखंड अंतर्गत बोरना पंचायत में भी यही प्रशासनिक खेल चल रहा है। पिछले दो सालों से पंचायत के सैकड़ों बाढ़ पीड़ित और नाविक अपने हक़ के पैसों के लिए ब्लॉक के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ 'आश्वासन' का झुनझुना थमाया जा रहा है।
जनता के इस 'त्राहिमाम' को देखते हुए ग्राम कचहरी बोरना के सरपंच और ग्राम एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह ने प्रशासन के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है।
🔴 अधिकारियों के झूठे वादे और 35 लाख के घोटाले का गणित
बोरना पंचायत में 7 सितम्बर 2025 को आयोजित एक जन-बैठक के दौरान ज़मीनी हकीकत का पर्दाफाश हुआ। सरपंच नवल किशोर सिंह ने बताया कि पिछले साल भी पंचायत के 385 लोगों को जीआर राशि नहीं मिली थी। इस साल यह आँकड़ा बढ़कर 500 के पार पहुँच गया है। अधिकारी लगातार यह आश्वासन दे रहे हैं कि "सबका पैसा आएगा", लेकिन पिछले साल ठगे जाने के बाद अब जनता का प्रशासनिक वादों से पूरी तरह भरोसा उठ चुका है।
ज़रा इस गोलमाल के गणित को समझिए: बिहार सरकार बाढ़ पीड़ित को GR राशि के तौर पर अमूमन ₹7,000 देती है। अगर बोरना पंचायत के 500 लोगों का पैसा अटका है, तो इसका सीधा मतलब है कि लगभग 30 से 35 लाख रुपये का गोलमाल! आखिर जनता के हक़ का यह लाखों रुपया सिस्टम की किन फाइलों के नीचे दबा दिया गया है?
🟢 'डस्टबिन में फेंके गए बाढ़ पीड़ितों के कागज़ात'
इस पूरी व्यवस्था में अधिकारियों की संवेदनहीनता का सबसे बड़ा सुबूत तब सामने आया जब सरपंच ने बताया कि त्रुटि सुधार (Correction) के लिए जो दस्तावेज़ जमा किए गए थे, उन्हें ठीक करने के बजाय अधिकारियों ने डस्टबिन में फेंक दिया।
जब गोगरी में DM साहब के साथ बैठक हुई थी, तब उन्होंने स्पष्ट कहा था कि कोई पोर्टल बंद नहीं होगा और जो जेन्युइन हैं, सबको पैसा दिया जाएगा। लेकिन ज़मीनी स्तर पर संशोधन कराकर दिए गए पेपर्स को डस्टबिन में डाल दिया गया! किसी का संशोधन नहीं हुआ और किसी को पैसा नहीं मिला।
🔴 नाविकों (Rescue Workers) के साथ सिस्टम की क्रूरता
सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि आपातकाल में प्रशासन का साथ देने वाले नाविक भी इस लचर सिस्टम का शिकार हुए हैं। जो नाविक अपनी जान हथेली पर रखकर बाढ़ के समय लोगों को सुरक्षित निकालते हैं, उन्हें ही प्रशासन ने पिछले 2 साल से एक रुपया नहीं दिया है। यह मामला DM और SDO तक पहुँचाया जा चुका है, फिर भी फाइलें धूल फांक रही हैं। बड़ा सवाल यह है कि सिस्टम की इस क्रूरता के बाद, क्या अगली बार किसी आपातकाल में कोई नाविक प्रशासन की मदद के लिए आगे आएगा?
✊ CO को अल्टीमेटम और खगड़िया ज़िले के लिए खुला निमंत्रण
बोरना पंचायत की जनता अब और इंतज़ार करने के मूड में नहीं है। सरपंच नवल किशोर सिंह के नेतृत्व में लगभग 500 पीड़ितों की पूरी लिस्ट तैयार कर ली गई है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी খোলা है कि वे जनता के साथ सीधे अंचलाधिकारी (CO) के पास जाएंगे और उनके आधिकारिक लेटरहेड पर यह लिखित आवेदन सौंपेंगे। यदि CO साहब पैसा निर्गत नहीं करते हैं, तो यह लड़ाई सीधे जिलाधिकारी (DM) के दरवाज़े तक जाएगी।
📣 पूरे खगड़िया ज़िले के बाढ़ पीड़ितों के लिए संदेश
एक ग्राम एक्टिविस्ट के तौर पर नवल किशोर सिंह ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई सिर्फ गोगरी प्रखंड या बोरना पंचायत की नहीं है। अगर खगड़िया ज़िले के किसी भी प्रखंड, किसी भी पंचायत या किसी भी गाँव में बाढ़ पीड़ितों की GR राशि या नाविकों के पैसे का यही हाल है, तो बेझिझक हमारे जन-संपर्क नंबर पर संपर्क करें। हम मिलकर इस लड़ाई को DM के दरवाज़े तक ले जाएंगे। जनता का एक भी पैसा भ्रष्ट तंत्र की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा।
📞 हेल्पलाइन / जन-संपर्क: 8825330030