छोटी सी कुटिया और परवाह पुरे समाज की: गोविन्दपुर नाला मरम्मत के लिए नवल के कलम की आवाज

महेशखूंट से बोरना गाँव को जोड़ने वाली ग्रामीण पथ मध्य में गोविन्दपुर से गुजरने के क्रम में, लम्बे समय से नाला डैमेज पड़ा हुआ है. नाला के क्षतिग्रस्त होने के कारण सड़क पिछले डेढ़ साल से नाले के पानी से डूबा हुआ है.

जनता परेशान है नेता मगन है!

हमने डेढ़ साल में कई बार सम्बंधित अधिकारियों और विभागों को पत्र लिखा है और आज पुनः मैं एक पत्र लिखकर प्रखंड विकास पदाधिकारी गोगरी श्कोरी रघुनन्दन कुमार जी को इस नाले को अतिशीघ्र मरम्मत कराने के लिए अनुरोध कर रहा हूँ.

a very closeup shot of naval singh writing letter on his letterhead for repairing of damaged sewage at mid of govindpur
BDO-गोगरी (रघुनन्दन कुमार) को महेशखूंट-बोरना के मध्य गोविंदपुर में क्षतिग्रस्त नाले की मरम्मत के लिए पत्र लिखते बोरना सरपंच नवल किशोर सिंह

प्रखंड विकास पदाधिकारी को पत्र लिखने वाला मैं कौन होता हूँ ?

मैं हूँ नवल किशोर सिंह और खगड़िया-जिला गोगरी-प्रखंड के ग्राम कचहरी बोरना का मैं सरपंच हूँ. 2021 के बिहार पंचायत चुनाव में पहली बार प्रत्याशी के रूप में मैंने दावेदारी पेश की और बोरना पंचायत की जनता ने मुझपर भरोसा करते हुए मुझे अगले 5 साल (2021-2026) सरपंच के तौर पर चुनकर इस पंचायत के न्यायिक व्यवस्था की जिम्मेदारी दी. 
ये है, ग्राम पंचायत बोरना के सरपंच के तौर पर मेरी पहचान. और इसके साथ ही मैं एक जिम्मेदार नागरिक होने के साथ साथ एक जिम्मेदार सामाजिक कार्यकर्त्ता हूँ और ये सब पहचान मिलकर मुझे मेरा कर्तव्य हमेशा याद दिलाते हैं. और ताकत देते हैं जिम्मेदार कुर्सी और व्यवस्था को पत्र लिखकर उन्हें उनकी ड्यूटी के लिए force करूँ। 

सरपंच बनाम सामाजिक कार्यकर्त्ता: क्या है नवल किशोर की असली पहचान ?

जिस नाले की समस्या पर मैं पत्र लिख रहा हूँ वो गोविन्दपुर गाँव मदारपुर पंचायत के अंतर्गत आता है, अगर मैं सिर्फ अपनी सरपंच की कुर्सी का दायरा देखकर काम करूँगा तो ये एक्टिविस्ट नवल और सामाजिक कार्यकर्त्ता की हत्या होगी. किस काम का ऐसा सरपंच होना जो अपना क्षेत्र देखकर वाजिब हक़ की बात ना करेगा ?

बोरना एक रिमोट विलेज है जो अपने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मुख्य रूप से महेशखूंट के लोकल बाजार पर निर्भर है. सिर्फ बोरना ही नहीं बल्कि पुरे गोगरी प्रखंड में दो ही मुख्य बाजार हैं, पहला गोगरी का बाजार और दूसरा महेशखूंट का बाजार.
महेशखूंट से बोरना को जोड़ने वाली ये मुख्य सड़क है जो एकदम बीचोबीच गोविन्दपुर से गुजरती है और बिच में ही डेढ़ साल से डेमेज नाले के कारण भीषण गन्दगी के साथ अराजक स्थिति बनी हुई है.

अगर नवल किशोर सिंह सिर्फ बोरना तक की ही बात करेगा तो फिर तो ये क्या कोई भी सड़क, कोई भी नाला नहीं बनने वाला! क्योंकि सब जानते हैं इस देश में "भ्रष्टाचार परमोधर्मः" है! मैं अबतक इस बदहाल सड़क को दुरुस्त करने के लिए कई बार पदाधिकारियों से मौखिक अनुरोध करने के साथ तीन बार अपने लेटरहेड पर लिखित में पदाधिकारी एवं पंचायती राज को लिखकर आवश्यक कदम उठाने के बारे में गंभीरता से अनुरोध कर चूका हूँ.

naval kishor singh writing letters to authorities and government official bodies sitting at his home. home wall are made of bricks that shows his honesty. multiphle angle shot are compiled in sigle frame by gemini ai
छोटी सी कुटिया- अपने दरवाजे पर बैठ कर अधिकारीयों को पत्र लिखते N.K. Singh. google ai से पुरे परिदृश्य को एक सिंगल panaroma फ्रेम में बनाया गया.

समझा जा सकता है की एक नाला, एक सड़क को बनाना नहीं बल्कि मरम्मत कराना है और इसके लिए बार बार मुझे सरपंच होते हुए अगर इतना पत्राचार करा पड़ रहा है तो आम जनता के साथ ये भ्रष्ट व्यवस्था, ये मोटी चमड़ी वाले पदाधिकारी किस तरह से व्यवहार करते होंगे ?

इतना ही नहीं, 2024 में हमने याने मेरे सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिसमे से मुख्यतः- मिन्हाज़ भारती, जहीर आलम, नवीन रजक, महावीर केसरी थे हम सबने मिलकर बड़ा जन आंदोलन किया इसी सड़क, नाला, बिजली PHED की बर्बाद स्थिति को दुरुस्त कर सभी पंचायत को मुख्य मार्ग महेशखूंट से जोड़ने में तत्काल विभाग के द्वारा करवाई करने के लिए दबाब बनाने हेतु. (पढ़िए- 2024 का जुलाई आंदोलन)

इस बारे में मिन्हाज़ भारती ने विस्तार से सीरिज बनाकर अपने वेबसाइट पर लिखा है.

भाग 1

तो 2024 के व्यापक आंदोलन के बाद भी पूरा साल 2025 मैंने पत्र लिखकर जिम्मेदार विभाग और पदाधिकारी से अगर नाला ठीक करने के लिए गुहार लगाई तो आप लोग समझ सकते हैं कितनी मोटी चमड़ी हैं दफ्तर में ac में बैठे इन बाबुओं की. सबूत के तौर पर इसी पोस्ट में मैं सभी पत्र की तस्वीरें लगा रहा हूँ.


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