सरकारी स्कूल पीरपैंती (कोयला पंचायत) की जर्जर छत: क्या बच्चों की जान की कीमत पर सुनेंगे सांसद राजेश वर्मा?
सरकारी स्कूल पीरपैंती (कोयला पंचायत) की जर्जर छत: क्या बच्चों की जान की कीमत पर सुनेंगे सांसद राजेश वर्मा?
आज दिनांक 8 अप्रैल 2026 को खगड़िया जिला के अंतर्गत आने वाले एक पंचायत कोयला के अंतर्गत पीरपैंती गाँव के सरकारी विद्यालय की खतरनाक जर्जर हालत पर nksingh ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) प्रोफाइल पर पोस्ट करके सांसद श्री Rajesh वर्मा और उपमुख्यमंत्री श्री Samrat चौधरी का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया है।
आइये पढ़ते हैं इस पूरी रिपोर्ट में नवल किशोर सिंह ने कैसे बच्चों की जिंदगी पर मंडरा रहे खतरे के मद्देनजर सोशल मीडिया X के माध्यम से अपनी आवाज सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने की कोशिश की है।
पीरपैंती स्कूल की जर्जर छत: बच्चों की जान जोखिम में!
कोयला पंचायत के सरकारी स्कूल में मंडराता खतरा — सरपंच नवल किशोर सिंह ने सांसद राजेश वर्मा और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से की तुरंत मरम्मत की अपील
खगड़िया, 08 अप्रैल 2026 — ग्राम एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह, बोरना पंचायत के सरपंच और AAP खगड़िया जिला महासचिव, एक बार फिर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए आगे आए हैं। इस बार मुद्दा है कोयला पंचायत स्थित पीरपैंती स्कूल की बेहद जर्जर छत का। स्कूल की छत का प्लास्टर पूरी तरह उखड़ चुका है, जंग लगे रीबार (स्टील की सरिया) खुले में लटक रहे हैं और बारिश के पानी से दीवारें सड़ चुकी हैं। ऐसी हालत में बच्चे रोजाना जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं।
तस्वीरों में साफ दिख रहा है खतरा
पोस्ट में साझा की गई चार तस्वीरों को देखकर कोई भी स्तब्ध रह जाएगा:
- एक कमरे की पूरी छत का प्लास्टर उखड़कर गिर चुका है।
- जंग खाए रीबार की ग्रिड स्पष्ट दिख रही है।
- कोने में बड़ा छेद हो गया है, जहां से तेज रोशनी आ रही है।
- पानी का रिसाव, फफूंदी और काला-भूरा दाग — सब कुछ बता रहा है कि छत किसी भी समय गिर सकती है।
यह कोई साधारण समस्या नहीं है। यह बच्चों की जिंदगी का सवाल है।
अगस्त 2025 से चला आ रहा है अलर्ट
ग्राम एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह ने अगस्त 2025 में ही इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों को सूचित किया था। लेकिन आठ महीने बीत गए, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरपंच ने कहा, “हम स्मार्ट सिटी मिशन की बात करते हैं, लेकिन गांव के स्कूलों की यह हालत देखकर लगता है कि विकास सिर्फ शहरों तक सीमित है।”
स्मार्ट सिटी मिशन की पोल खुल गई
2014-15 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्मार्ट सिटी मिशन में 100 शहरों को आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन खगड़िया जिले के कोयला पंचायत जैसे इलाकों में बुनियादी सुविधाएं — जैसे स्कूल की सुरक्षित छत — तक उपलब्ध नहीं हैं। क्या स्मार्ट सिटी सिर्फ शहरों के लिए है? गांव के बच्चे क्या करें?
जनप्रतिनिधियों से सीधी अपील
सरपंच नवल किशोर सिंह ने माननीय सांसद श्री राजेश वर्मा (@Rajeshverma_LJP) और माननीय उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी (@samrat4bjp) को टैग करते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने लिखा है:
“बच्चे स्कूल जाते हैं तो पढ़ाई करने, जान बचाने के लिए नहीं। तुरंत मरम्मत करवाएं, वरना कोई बड़ी दुर्घटना होने पर कौन जवाबदेह होगा?”
ध्यानाकर्षण हेतु, माननीय संसद महोदय @Rajeshverma_LJP माननीय उपमुख्यमंत्री श्री @samrat4bjp जी,
— Naval Kishor Singh (@nksingh_in) April 8, 2026
वर्ष 2014-15 में माननीय @narendramodi जी ने स्मार्ट सिटी की घोषणा की थी, देश में 100 स्मार्ट सीटी के लक्ष्य में कम से कम सरकारी स्चूलों की ये स्थिति पर तो अत्यंत आवश्यक कदम उठते हुए… pic.twitter.com/slqxzC4CbF
प्रशासन से अपील
यह सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं है। बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों की यही स्थिति है। पंचायती राज व्यवस्था की मजबूती तभी संभव है जब हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही हो।
ग्राम एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह हमेशा की तरह इस मुद्दे को लेकर सतर्क हैं और जनता के हित में लगातार आवाज उठा रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस अपील पर कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं।
आपकी भूमिका
अगर आप भी इस मुद्दे से जुड़े हैं या खगड़िया जिले के किसी अन्य स्कूल की ऐसी समस्या जानते हैं, तो कमेंट में अपनी राय जरूर दें। साथ ही सांसद और उपमुख्यमंत्री को टैग कर इस पोस्ट को शेयर करें।
जनता की आवाज = प्रशासन की जवाबदेही
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