ग्राउंड रिपोर्ट | सिरजुआ गांव, चैधा बन्नी, बन्नी पंचायत, गोगरी प्रखंड, खगड़िया, बिहार
बिहार के खगड़िया जिले के गोगरी प्रखंड अंतर्गत बन्नी पंचायत के चैधा बन्नी क्षेत्र में आने वाला सिरजुआ गांव जलनिकासी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। गांव में बना नाला देखने में भले विकास कार्य का हिस्सा लगे, लेकिन ग्रामीणों की बातों और मौके की स्थिति से यह साफ होता है कि यह नाला अब सुविधा से ज्यादा परेशानी का कारण बन चुका है।
ग्राम एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह जब सिरजुआ गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उन्हें गांव की इस समस्या से रूबरू कराया। यह सिर्फ एक जाम नाले की कहानी नहीं थी, बल्कि ग्रामीण जीवन की उस रोजमर्रा की परेशानी की तस्वीर थी, जिसमें गंदा पानी, जाम निकासी, बीमारियों का डर और प्रशासन तक बात पहुंचाने की बेचैनी सब एक साथ दिखाई देती है।
रिपोर्ट की शुरुआत स्थानीय बुजुर्ग ललित देव प्रसाद से बातचीत से होती है। नवल किशोर सिंह ने उनसे पूछा, “बाबा, क्या नाम है आपका?” जवाब मिला, “ललित देव प्रसाद।” इसके बाद बातचीत सीधे उस नाले पर आ गई, जिसकी वजह से गांव के लोग परेशान हैं।
ललित देव प्रसाद और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि नाले में पानी की निकासी ठीक से नहीं हो रही है। नाला जगह-जगह जाम है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी आगे बढ़ने के बजाय रुक जाता है। कहीं नाला ऊंचा है, कहीं गड्ढा है, कहीं मिट्टी भर गई है और कहीं सफाई की व्यवस्था ही सही ढंग से नहीं बन पाई है।
नवल किशोर सिंह ने मौके पर नाले की स्थिति देखते हुए पूछा कि ऊपर में कहीं ढक्कन या चेंबर है या नहीं। बातचीत के दौरान यह बात सामने आई कि नाले की गहराई और ढाल को लेकर भी ग्रामीणों में चिंता है। ग्रामीणों का कहना था कि नाले को सही ढंग से बनाया या सुधारा नहीं गया, इसलिए पानी का बहाव रुक जाता है।
ललित देव प्रसाद ने कहा कि नाले को ऊंचा करना या सही स्तर पर लाना जरूरी है। उनके अनुसार जब तक नाले की बनावट और ढाल ठीक नहीं होगी, तब तक पानी की निकासी सही नहीं हो पाएगी।
मुखिया से शिकायत, लेकिन जवाब मिला — “आवंटन नहीं है”
बातचीत के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर वे मुखिया से भी बात कर चुके हैं। ललित देव प्रसाद ने कहा कि उन्होंने मुखिया जी से बात की, लेकिन मुखिया की ओर से जवाब मिला कि अभी आवंटन नहीं है।
इस पर नवल किशोर सिंह ने ग्रामीणों को सलाह दी कि वे इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी यानी BDO को आवेदन दें। उन्होंने कहा कि अगर पंचायत स्तर पर पैसा नहीं है, तो ब्लॉक स्तर से समाधान की मांग की जा सकती है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि आवेदन बनाइए, वे भी साथ रहेंगे और अधिकारी से बात करेंगे।
यहां नवल किशोर सिंह का रुख सिर्फ सवाल उठाने वाला नहीं था, बल्कि समाधान की तरफ बढ़ने वाला था। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि समस्या को सही तरीके से प्रशासन के सामने रखना जरूरी है।
30–40 फीट दूर चेंबर, संकरा नाला और सफाई की असंभव स्थिति
इस रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा नाले की तकनीकी खामी से जुड़ा है। नवल किशोर सिंह ने मौके पर देखकर कहा कि एक चेंबर तो बना है, लेकिन उसके बाद काफी दूर तक कोई चेंबर नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि चेंबर 30–40 फीट की दूरी पर है।
नवल किशोर सिंह ने सवाल उठाया कि जब चेंबर इतने दूर-दूर हैं, तो सफाई कैसे होगी? ग्रामीणों ने भी यही चिंता जताई। उनका कहना था कि नाला इतना संकरा है कि उसमें सफाई कर्मी घुस ही नहीं सकता।
एक ग्रामीण ने साफ कहा कि यह 10 इंच का नाला है। इतने छोटे नाले में लेबर कैसे घुसेगा? अगर नाला थोड़ा चौड़ा होता, तो सफाई संभव हो सकती थी। लेकिन संकरे नाले और दूर-दूर चेंबर के कारण जाम हटाना मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार पानी निकालने के लिए पंप सेट लगाना पड़ता है। जब पंप से प्रेशर दिया जाता है, तभी पानी आगे जाता है। इसका मतलब यह है कि प्राकृतिक जलनिकासी व्यवस्था अपने आप काम नहीं कर रही।
“यह पुराना सार्वजनिक नाला है” — जनार्दन दास ने बताई नाले की पृष्ठभूमि
बातचीत के दौरान जनार्दन दास नाम के ग्रामीण ने बताया कि यह कोई नया या निजी नाला नहीं है, बल्कि पुराना सार्वजनिक नाला है। उनके अनुसार यह कसरैया जाने वाला मुख्य नाला रहा है और सिरजुआ गांव के कई घरों का पानी इसी रास्ते से निकलता है।
जनार्दन दास ने कहा कि अगर इस नाले की सफाई कर दी जाए, तो सब घरों का पानी बह जाएगा। उनके बयान से यह साफ होता है कि समस्या किसी एक परिवार या एक घर तक सीमित नहीं है। यह पूरे मोहल्ले और कई परिवारों की साझा समस्या है।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले यही मुख्य सार्वजनिक निकासी का रास्ता था। समय के साथ लोगों ने अपने-अपने घरों के नाले इसी मुख्य नाले से जोड़ दिए, लेकिन मुख्य नाले की सफाई, चौड़ाई और चेंबर की व्यवस्था उस हिसाब से मजबूत नहीं की गई।
महिलाओं और बच्चों की परेशानी भी इस समस्या से जुड़ी
रिपोर्ट के दौरान एक स्थानीय महिला भी समस्या बताती दिखती हैं। भले उनका नाम बातचीत में स्पष्ट नहीं आता, लेकिन उनकी मौजूदगी यह बताती है कि जलजमाव की समस्या सिर्फ पुरुषों या खेत-खलिहान तक सीमित नहीं है। घरों के आसपास गंदा पानी भरने से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भी रोजमर्रा की परेशानी झेलनी पड़ती है।
स्क्रीनशॉट्स में जलजमाव वाले हिस्से साफ दिखाई देते हैं। घरों के पास पानी जमा है। रास्ता प्रभावित है। लोगों को उसी माहौल में रहना और गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में गंदगी, बदबू, मच्छर और बीमारी का खतरा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर नाले की सफाई बेहतर ढंग से होती रहे, तो नाला नहीं भरेगा। लेकिन इसके लिए सिर्फ सफाई कर्मी भेजना काफी नहीं है। चेंबर की दूरी कम करनी होगी, नाले की चौड़ाई और ढाल पर ध्यान देना होगा और जहां जरूरत है, वहां नए चेंबर बनाने होंगे।
“सरकार की निंदा नहीं, समस्या को उजागर करना है” — नवल किशोर सिंह
रिपोर्ट के अंतिम हिस्से में नवल किशोर सिंह ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि सरकार की निंदा नहीं करनी है। समस्या को उजागर करना है और पदाधिकारी से अनुरोध करके काम कराना है।
उनका यह बयान इस रिपोर्ट को एक जिम्मेदार ग्राम एक्टिविज़्म का रूप देता है। यहां उद्देश्य किसी व्यक्ति, पंचायत या सरकार को सिर्फ कटघरे में खड़ा करना नहीं है। उद्देश्य है — गांव की वास्तविक समस्या को सामने लाना, ग्रामीणों की आवाज़ को प्रशासन तक पहुंचाना और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाना।
नवल किशोर सिंह ने साफ कहा कि किसी से उलझना नहीं है। काम को उजागर करना है और संबंधित अधिकारी से बात करके समाधान निकालना है।
ग्रामीणों की मांग क्या है?
सिरजुआ गांव के ग्रामीणों की मांगें साफ हैं। वे चाहते हैं कि नाले की ठीक ढंग से सफाई हो। जहां चेंबर की जरूरत है, वहां चेंबर बने। नाला इतना चौड़ा हो कि सफाई संभव हो सके। पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था बने। बरसात में सड़क और घरों के आसपास गंदा पानी जमा न हो।
ग्रामीण यह भी चाहते हैं कि प्रशासन इस समस्या को छोटी शिकायत मानकर नजरअंदाज न करे। उनके लिए यह रोजमर्रा के जीवन, स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ा मामला है।
सवाल सिर्फ नाले का नहीं, गांव के विकास की गुणवत्ता का है
सिरजुआ गांव की यह समस्या ग्रामीण विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अगर नाला बना है, लेकिन उसकी सफाई नहीं हो सकती, तो वह निर्माण कितना उपयोगी है? अगर चेंबर 30–40 फीट दूर हैं और नाला सिर्फ 8–10 इंच चौड़ा है, तो जाम होने पर पानी निकलेगा कैसे?
यह सवाल सिर्फ सिरजुआ गांव का नहीं है। यह उन सभी गांवों का सवाल है जहां विकास कार्य तो होते हैं, लेकिन उनकी योजना, डिजाइन और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
सिरजुआ गांव के लोग अब समाधान की प्रतीक्षा में हैं। ग्राम एक्टिविस्ट नवल किशोर सिंह ने मुद्दा उठाया है, ग्रामीणों की बात सुनी है और BDO को आवेदन देने की सलाह दी है। अब उम्मीद प्रशासन से है कि वह इस समस्या को गंभीरता से ले और गांव को गंदे पानी, जाम नाले और जलजमाव से राहत दिलाए।
सवाल अब भी वही है — जब नाला इतना संकरा है, तो सफाई कैसे होगी?

