जनता से मेरा सीधा सवाल—सरकार को इस सड़क के नए निर्माण की स्वीकृति देनी चाहिए या नहीं?
चौथम प्रखंड। मैं नवल किशोर सिंह, बोरना पंचायत का सरपंच हूं। लेकिन आज मैं केवल बोरना पंचायत के सरपंच के रूप में नहीं, बल्कि एक ग्राम एक्टिविस्ट और जनता की आवाज के रूप में आपसे संवाद कर रहा हूं।
आज मेरा सवाल ठठा से नीरपुर तक जाने वाली 4.90 किलोमीटर सड़क को लेकर है।
यह सड़क आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस सड़क से ग्रामीण, विद्यार्थी, किसान, मजदूर, दुकानदार और राहगीर प्रतिदिन आवागमन करते हैं। सड़क का निर्माण कार्य पूरा हुए कई वर्ष हो चुके हैं और निर्धारित अनुरक्षण अवधि भी वर्ष 2025 में समाप्त हो चुकी है।
अब सवाल यह है कि जब किसी सड़क की निर्धारित अनुरक्षण अवधि समाप्त हो जाती है और सड़क की स्थिति भी खराब होने लगती है, तो क्या सरकार को उसके नए निर्माण की दिशा में पहल नहीं करनी चाहिए?
मेरा सवाल जनता से भी है और सरकार से भी—क्या इस सड़क के नए निर्माण की स्वीकृति मिलनी चाहिए या नहीं?
अगर सरकार ने पहले ही इस सड़क के नए निर्माण की स्वीकृति दे दी है, तो बहुत अच्छी बात है। ऐसी स्थिति में मेरे द्वारा उठाया गया यह मुद्दा स्वतः ही समाप्त हो जाएगा। और अगर अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है, तो मेरी मांग है कि सरकार इस महत्वपूर्ण सड़क पर गंभीरता से विचार करे और जनहित में आवश्यक कार्रवाई करे।
इसी उद्देश्य से मैंने पथ निर्माण विभाग (RWD), ईई गोगरी अनुमंडल को व्हाट्सऐप के माध्यम से आवेदन भेजा है।
आवेदन पत्रांक संख्या: 122/26
दिनांक: 23 जुलाई 2026
मेरी चिंता केवल इतनी है कि जनता को अच्छी सड़क मिले। ग्रामीणों को गड्ढों और जर्जर रास्तों से होकर आवागमन न करना पड़े। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी न हो। मरीजों को अस्पताल ले जाने में दिक्कत न हो। किसान अपनी उपज बाजार तक आसानी से पहुंचा सकें और आम लोगों का आवागमन सुरक्षित हो।
मैं केवल बोरना का सरपंच नहीं हूं—मैं जनता की आवाज बनना चाहता हूं
कई लोग मुझसे पूछते हैं कि नवल किशोर सिंह, आप दूसरे प्रखंड और दूसरी पंचायतों की समस्याओं को लेकर क्यों आवाज उठाते हैं?
मेरा जवाब बहुत सीधा है।
मैं बोरना पंचायत का सरपंच हूं, इसलिए बोरना की जनता के प्रति मेरी जिम्मेदारी है। लेकिन मैं केवल सरपंच नहीं हूं। मैं एक ग्राम एक्टिविस्ट भी हूं।
जब मुझे पकरैल पंचायत की समस्या दिखाई देती है, तो मैं उसके बारे में सोचता हूं।
जब चौथम प्रखंड की जनता की समस्या सामने आती है, तो मैं उस पर आवाज उठाने का प्रयास करता हूं।
जब बन्नी पंचायत की समस्या सामने आती है, तो मैं उसे भी जनता का मुद्दा मानता हूं।
जब महेशखूंट पंचायत, मदारपुर पंचायत, करवा मोड़ या किसी अन्य क्षेत्र की जनता की समस्या मेरे सामने आती है, तो मैं यह नहीं सोचता कि यह मेरे पंचायत का मामला है या नहीं।
मैं यह सोचता हूं—
क्या वहां जनता परेशान है?
अगर जनता परेशान है, तो उसकी आवाज उठनी चाहिए।
अगर कोई सार्वजनिक भवन जर्जर है, तो उसकी मरम्मत होनी चाहिए।
अगर कोई सड़क टूट गई है, तो उसका निर्माण होना चाहिए।
अगर किसी गांव में पानी की समस्या है, तो उसका समाधान होना चाहिए।
अगर किसी सरकारी योजना का लाभ जनता तक नहीं पहुंच रहा है, तो उस पर सवाल उठना चाहिए।
जनता की समस्या की कोई सीमा नहीं होती
जनता की समस्या यह देखकर नहीं आती कि वह गोगरी प्रखंड में है या चौथम प्रखंड में। जनता की परेशानी को प्रखंड की सीमा में बांधा नहीं जा सकता।
पकरैल की जनता भी हमारी जनता है।
चौथम की जनता भी हमारी जनता है।
बन्नी की जनता भी हमारी जनता है।
महेशखूंट की जनता भी हमारी जनता है।
मदारपुर की जनता भी हमारी जनता है।
करवा मोड़ पर परेशान होने वाला दुकानदार, विद्यार्थी और राहगीर भी हमारी जनता है।
जहां जनता की समस्या है, वहां एक जनसेवक और एक्टिविस्ट की जिम्मेदारी है कि वह आवाज उठाए।
मैं यह दावा नहीं करता कि मैं हर समस्या का समाधान अकेले कर सकता हूं। लेकिन मैं यह जरूर कहता हूं कि जहां तक संभव होगा, मैं जनता की समस्याओं को संबंधित अधिकारियों और विभागों तक पहुंचाने का प्रयास करता रहूंगा।
मेरा उद्देश्य किसी विभाग या सरकार का विरोध करना नहीं है। मेरा उद्देश्य है कि सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचे और जनता की वास्तविक समस्याओं पर प्रशासन और विभागों का ध्यान जाए।
ठठा-नीरपुर सड़क को लेकर मेरी चिंता क्यों है?
मैं चाहता हूं कि इस सड़क की वर्तमान स्थिति का विभागीय स्तर पर आकलन हो।
अगर सड़क के नए निर्माण की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है, तो यह जनता के लिए खुशी की बात है।
अगर स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है, तो उसे जल्द पूरा किया जाए।
और अगर अभी तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है, तो विभाग को इस महत्वपूर्ण सड़क की स्थिति को देखते हुए आवश्यक कदम उठाना चाहिए।
मेरी चिंता किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है।
मैं इस सड़क से कोई निजी लाभ नहीं चाहता।
मेरी चिंता उस ग्रामीण की है जो रोज इस सड़क से गुजरता है।
मेरी चिंता उस विद्यार्थी की है जो स्कूल और कॉलेज जाने के लिए इस सड़क का इस्तेमाल करता है।
मेरी चिंता उस मरीज की है जिसे समय पर अस्पताल पहुंचना होता है।
मेरी चिंता उस किसान की है जिसे अपनी फसल बाजार तक ले जानी होती है।
और मेरी चिंता उस आम नागरिक की है, जो सरकार से केवल इतना चाहता है कि उसे सुरक्षित, सुगम और अच्छी सड़क मिले।
जनता से मेरा सवाल
क्या ठठा से नीरपुर तक 4.90 किलोमीटर सड़क के नए निर्माण की स्वीकृति मिलनी चाहिए?
अगर आपका जवाब हां है, तो यह आवाज जनता की आवाज है।
मैं इस मुद्दे को संबंधित विभाग तक पहुंचाने का अपना प्रयास कर रहा हूं।
क्योंकि मैं केवल अपने पंचायत की सीमा तक सीमित रहकर काम नहीं करना चाहता।
जहां जनता की समस्या है, वहां मेरी आवाज पहुंचनी चाहिए।
जहां जनता परेशान है, वहां एक जनसेवक को खड़ा होना चाहिए।
और जहां जनता अपने अधिकार और सुविधा के लिए आवाज उठाना चाहती है, वहां मैं जनता की आवाज बनने का प्रयास करता रहूंगा।
मैं सरपंच हूं—लेकिन केवल एक पंचायत का नहीं।
मैं ग्राम एक्टिविस्ट हूं—और मेरी चिंता हर उस जनता के लिए है, जिसकी आवाज कहीं दब जाती है।
जनता की समस्या सामने आएगी, तो आवाज भी उठेगी।
जनता की आवाज उठती रहेगी।
— नवल किशोर सिंह (एनके सिंह)
ग्राम एक्टिविस्ट | सरपंच, बोरना पंचायत
गोगरी, खगड़िया, बिहार
आवेदन पत्रांक: 122/26 | दिनांक: 23/07/2026